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कोरबा के शिवपुर फुलवारीपारा में मिली 368 वर्ष पुरानी पांडुलिपि


📰CG ई खबर | सांस्कृतिक विरासत की बड़ी खोज

📲 “ज्ञानभारतम” एप से हुआ डिजिटल संरक्षण

(CG ई खबर | कोरबा, 26 अप्रैल 2026) : छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले से एक ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण खबर सामने आई है। पाली विकासखंड के दूरस्थ ग्राम शिवपुर फुलवारीपारा में 368 वर्ष पुरानी दुर्लभ हस्तलिखित पांडुलिपियों की खोज हुई है। यह उपलब्धि “ज्ञानभारतम” राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान के तहत व्यापक सर्वेक्षण के दौरान हासिल हुई।

कलेक्टर कुणाल दुदावत के मार्गदर्शन में चल रहे इस अभियान के तहत 26 अप्रैल 2026 को सर्वेक्षण टीम को सन 1658 की प्राचीन पांडुलिपियाँ प्राप्त हुईं। जिला समन्वयक सतीश प्रकाश सिंह ने मौके पर ही “ज्ञानभारतम” एप के माध्यम से इनका डिजिटल संरक्षण किया। कुल 25 प्राचीन पांडुलिपियों का सर्वेक्षण कर उनका डिजिटलीकरण किया गया।


📚 इन ऐतिहासिक ग्रंथों का हुआ संरक्षण

इन पांडुलिपियों में कई महत्वपूर्ण और दुर्लभ ग्रंथ शामिल हैं—

  • 📖 “खूब तमाशा” (1658) – लेखक: गोपाल मिश्र (औरंगज़ेब कालीन साहित्य)
  • 📖 नासकेतु ग्रंथ (1829) – लेखक: मनीराम अग्रवाल
  • 📖 वैदेकीय पोथी (1831)
  • 📖 वेदारत्न पंच प्रकाश (1852) – लेखक: गोस्वामी जनार्दन भट्टाचार्य

सभी पांडुलिपियाँ देवनागरी लिपि और संस्कृत भाषा में लिखी गई हैं, जो क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक और साहित्यिक विरासत को दर्शाती हैं।

🎓 आचार्य डॉ. रमेन्द्र नाथ मिश्र का योगदान

कार्यक्रम में भाषाविद आचार्य डॉ. रमेन्द्र नाथ मिश्र विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने बताया कि इन पांडुलिपियों को उन्होंने लगभग 60 वर्षों तक सुरक्षित रखा। उन्होंने कहा कि ऐसी धरोहरें हमारे इतिहास, भाषा और संस्कृति को समझने का आधार हैं।

इस अवसर पर जिला प्रशासन की ओर से डिप्टी कलेक्टर टी.आर. भारद्वाज, तहसीलदार भूषण सिंह मंडावी एवं अन्य अधिकारियों ने शाल-श्रीफल भेंट कर उनका सम्मान किया।


📢 प्रशासन की अपील

डिप्टी कलेक्टर टी.आर. भारद्वाज ने ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों से अपील की कि जिले में मौजूद प्राचीन पांडुलिपियों को नष्ट होने से बचाने के लिए इस अभियान में सहयोग करें। वहीं जिला समन्वयक सतीश प्रकाश सिंह ने “ज्ञानभारतम” एप के माध्यम से डिजिटल संरक्षण की प्रक्रिया समझाते हुए सभी को इसमें भागीदारी के लिए प्रेरित किया।

👥 कार्यक्रम में रही व्यापक भागीदारी

कार्यक्रम में पुरातत्वविद जी.एल. रायकवार, सुभाष दत्त झा, शोधार्थी मनोज कुमार नायक, नायब तहसीलदार सुजीत पाटले, राशिका अग्रवाल, बीईओ एस.एन. साहू, तथा जिला संग्रहालय कोरबा के मार्गदर्शक हरि सिंह क्षत्रिय सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण, शिक्षक और अधिकारी उपस्थित रहे।


🟡 CG ई खबर की खास बात:

👉 यह खोज न सिर्फ कोरबा बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को नई मजबूती देती है।
👉 डिजिटल संरक्षण के जरिए अब ये धरोहर आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रहेंगी।

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