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दीपका में ‘काला जहर’ का कहर: कोयले की धूल में घुट रही ज़िंदगियां, प्रशासन बेखबर


दीपका/कोरबा (CG ई खबर) : 
कोयलांचल क्षेत्र के दीपका में प्रदूषण की स्थिति अब भयावह रूप ले चुकी है। एसईसीएल (SECL) प्रबंधन और नगर प्रशासन की लापरवाही के चलते स्थानीय नागरिक कोयले की काली धूल और जहरीले कणों के बीच जीवन जीने को मजबूर हैं। खदानों से निकलने वाले भारी वाहनों द्वारा उड़ाई जा रही धूल न केवल सड़कों पर अंधेरा छा रही है, बल्कि लोगों के स्वास्थ्य पर भी गंभीर असर डाल रही है।

कागजों में छिड़काव, जमीन पर उड़ती धूल

नियमों के अनुसार सड़कों पर नियमित जल छिड़काव किया जाना अनिवार्य है, लेकिन हकीकत इसके विपरीत है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि प्रशासन के दावे केवल फाइलों तक सीमित हैं। दिन-रात कोयले का गुबार उड़ता रहता है, जिससे राहगीरों और आसपास रहने वाले परिवारों का जीना दूभर हो गया है।

प्रशासनिक विफलता, पर्यावरण विभाग पर सवाल

इस गंभीर स्थिति के लिए पर्यावरण विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। नियमानुसार डस्ट मॉनिटरिंग और ऑडिट किया जाना चाहिए, लेकिन कार्रवाई के अभाव में नियमों की खुलेआम अनदेखी हो रही है। अधिकारियों की निष्क्रियता के कारण प्रदूषण का स्तर खतरे के निशान को पार कर चुका है।


स्वास्थ्य और सुरक्षा पर मंडराता खतरा

कोयले की सूक्ष्म धूल (PM 2.5 और PM 10) सीधे फेफड़ों में जाकर गंभीर बीमारियां पैदा कर रही है। धूल के गुबार के कारण सड़कों पर विजिबिलिटी लगभग शून्य हो जाती है, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बना रहता है।

जनता की प्रमुख मांगें

  • सड़कों पर नियमित जल छिड़काव और आधुनिक स्प्रिंकलर सिस्टम की तत्काल व्यवस्था
  • प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों और ठेकेदारों पर सख्त कार्रवाई
  • पर्यावरण नियमों का कड़ाई से पालन और नियमित मॉनिटरिंग
  • जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय कर दंडात्मक कार्रवाई

आंदोलन की चेतावनी

दीपका के नागरिकों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस ‘काले जहर’ से मुक्ति दिलाने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।

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