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अग्रवाल सम्मेलन में अरबों का घोटाला? अध्यक्ष पर चांदी, नकदी और जमीन गबन के गंभीर आरोप

 Image copy IBC24 

रायपुर।
से जुड़ा एक बड़ा विवाद सामने आया है, जिसने देशभर के अग्रवाल समाज में हलचल मचा दी है। संगठन के वर्तमान अध्यक्ष पर सैकड़ों किलो चांदी, करोड़ों रुपए और अरबों की जमीन के गबन के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

जानकारी के अनुसार, हरियाणा से संचालित इस संगठन से छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, असम, उड़ीसा, बंगाल, पंजाब और मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों के कारोबारी और समाजसेवी जुड़े हुए हैं। आरोप है कि संगठन की आड़ में बड़े स्तर पर आर्थिक अनियमितताएं की गईं।

रायपुर के सदस्य ने किया बड़ा खुलासा

रायपुर निवासी और संगठन के आजीवन सदस्य ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2010 में सदस्य बने गोपाल शरण गर्ग 2016 में चुनाव जीतकर अध्यक्ष बने थे। नियमों के मुताबिक उनका कार्यकाल 6 वर्ष का था, लेकिन 2024 में उन्होंने कथित रूप से अवैध बैठक कर कार्यकाल बढ़ा लिया।

मित्तल का आरोप है कि बिना आमसभा और पारदर्शी प्रक्रिया के चुनाव की तारीख घोषित कर दी गई, जबकि मतदाताओं और चुनाव अधिकारी की जानकारी तक सार्वजनिक नहीं की गई। साथ ही, अपने रिश्तेदारों को पदाधिकारी बनाकर संगठन की नियमावली में मनमाने बदलाव किए गए।

दान की रकम और चांदी का हिसाब गायब

खुलासे में यह भी सामने आया है कि हरियाणा के अग्रोहा में कुलदेवी महालक्ष्मी मंदिर निर्माण के नाम पर देशभर से लाखों रुपए का चंदा एकत्र किया गया। कई लोगों ने 5 लाख, 10 लाख से लेकर 11 लाख रुपए तक दान दिए, लेकिन यह राशि संगठन के आधिकारिक खातों में दर्ज नहीं की गई।

इतना ही नहीं, मंदिर में चांदी चढ़ाने के नाम पर करीब 200 किलो से अधिक चांदी दान में ली गई, जिसका भी कोई स्पष्ट लेखा-जोखा नहीं है। आरोप है कि इस चांदी को बेचकर हवाला के जरिए पैसे का लेनदेन किया गया। असम इकाई से जुड़ी एक रसीद में 75 लाख रुपए के हवाला ट्रांजैक्शन का भी जिक्र सामने आया है।

दस्तावेज जलाने और प्रभाव जमाने के आरोप

मित्तल के मुताबिक, दान की रसीदें काटने के बाद कई दस्तावेजों को नष्ट कर दिया गया। साथ ही, गोपाल शरण गर्ग पर आरोप है कि उन्होंने खुद को संगठन का अध्यक्ष बताकर समाज और सरकार के कुछ लोगों को भ्रमित कर अपना प्रभाव बढ़ाया।

जांच की उठी मांग

इन गंभीर आरोपों के बाद समाज के लोगों ने निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है। मामला आर्थिक अनियमितताओं के साथ-साथ संगठनात्मक पारदर्शिता पर भी बड़े सवाल खड़े कर रहा है।

अब देखना होगा कि इन आरोपों पर संबंधित पक्ष क्या सफाई देता है और जांच एजेंसियां इस मामले में क्या कार्रवाई करती हैं।

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