प्रयागराज। ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि पति की मृत्यु के बाद भी पत्नी के भरण-पोषण का अधिकार समाप्त नहीं होता। अदालत ने कहा है कि विधवा महिला अपने ससुर से गुजारा भत्ता मांग सकती है, यदि वह स्वयं अपना पालन-पोषण करने में असमर्थ हो।
न्यायमूर्ति और की खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि पति पर पत्नी के भरण-पोषण का दायित्व एक स्थापित सिद्धांत है, जो पति की मृत्यु के बाद भी समाप्त नहीं होता।
अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसी परिस्थितियों में विधवा महिला को अपने ससुर से भरण-पोषण का दावा करने का अधिकार है। हालांकि, इसके लिए यह जरूरी है कि महिला अपने खुद की आय, संपत्ति, माता-पिता की संपत्ति या बच्चों के माध्यम से अपना गुजारा करने में पूरी तरह असमर्थ हो।
कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि ससुर के पास पैतृक या सहदायिक संपत्ति नहीं है या ऐसी संपत्ति से भरण-पोषण संभव नहीं है, तो यह दायित्व लागू नहीं होगा।
यह फैसला अकुल रस्तोगी की प्रथम अपील को खारिज करते हुए सुनाया गया। अदालत ने के प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा कि विधवा बहू को ससुर की संपत्ति से गुजारा भत्ता मांगने का अधिकार है, बशर्ते उसका पुनर्विवाह न हुआ हो।
📌 CG ई खबर निष्कर्ष:
इस फैसले से विधवा महिलाओं के अधिकारों को मजबूती मिली है और यह साफ संदेश दिया गया है कि पति की मृत्यु के बाद भी उनका भरण-पोषण सुनिश्चित किया जाना कानून की जिम्मेदारी है।

