कोरबा। श्री हनुमंत कथा के माध्यम से सनातन की अलख जगा रहे ने कथा के चौथे दिवस रात लगभग 9 बजे “अपना घर” सेवा आश्रम पहुंचकर वहां के लोगों को कृतार्थ किया।
आश्रम पहुंचने पर पंडित धीरेंद्र शास्त्री का स्वागत तिलक, वंदन और आरती के साथ प्रभजोत मुखर्जी द्वारा किया गया। इसके बाद सेवा आश्रम से जुड़े अन्य सदस्यों ने भी उनका आत्मीय स्वागत किया।
इस दौरान उन्होंने आश्रम में रह रहे मानसिक रूप से कमजोर एवं अनाथ बच्चों की सेवा को सराहनीय बताते हुए राणा मुखर्जी और उनकी धर्मपत्नी के सेवा कार्यों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की सेवा का प्रतिफल अवश्य मिलता है और जो कुछ भी हो रहा है, वह ईश्वर की कृपा और उसकी इच्छा से ही संभव है।
पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने “अपना घर” सेवा आश्रम की निरंतर प्रगति की कामना करते हुए सभी को आशीर्वचन प्रदान किया।
इस अवसर पर राणा मुखर्जी, प्रभजोत मुखर्जी एवं उनके परिवार सहित डॉ. प्रिंस जैन, पी.के. दत्ता, अमरजीत सिंह, शैलेन्द्र कुमार, अविनाश दुबे, ऋषभ शुक्ला, शीला सिंह, राजश्री अय्यर, विनीता सहित आश्रम परिवार के सदस्य एवं दानदाता बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।


