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फर्जी दस्तावेजों के सहारे नौकरी पाने वाला प्रशिक्षण अधिकारी गिरफ्तार, 9 माह में लिया 5 लाख वेतन


छत्तीसगढ़ / कोरबा।
जिले में शासकीय भर्ती प्रक्रिया में फर्जीवाड़े का बड़ा मामला सामने आया है। फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र और कूटरचित बैंक स्टेटमेंट के आधार पर प्रशिक्षण अधिकारी की नौकरी हासिल करने वाले आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। आरोपी ने लगभग 9 माह तक नौकरी करते हुए करीब 5 लाख रुपये वेतन भी प्राप्त कर लिया था। मामले की जांच शुरू होने के बाद उसने कार्रवाई के भय से नौकरी से इस्तीफा दे दिया था।

यह कार्रवाई कार्यालय संयुक्त संचालक (प्रशिक्षण), क्षेत्रीय कार्यालय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थाएं बिलासपुर की शिकायत के बाद की गई।

920 पदों की भर्ती में सामने आया मामला

जानकारी के अनुसार संचालनालय रोजगार एवं प्रशिक्षण छत्तीसगढ़, नवा रायपुर के अधीन आईटीआई संस्थानों में प्रशिक्षण अधिकारियों के 920 पदों पर भर्ती प्रक्रिया चल रही थी। इसी भर्ती प्रक्रिया में आरोपी अनिकेत कर्ष पिता उबारी लाल कर्ष (37 वर्ष), निवासी एमआईजी 1/5 एमपी नगर कोरबा ने कथित रूप से फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत कर नियुक्ति हासिल की।

उसे औद्योगिक प्रशिक्षण संस्था करतला में प्रशिक्षण अधिकारी (कम्प्यूटर ऑपरेटर एंड प्रोग्रामिंग असिस्टेंट) के पद पर 3 वर्ष की परिवीक्षा अवधि के लिए पदस्थ किया गया था। आरोपी ने 13 मार्च 2024 को कार्यभार ग्रहण किया था।

सत्यापन समिति भी नहीं पकड़ पाई कूटरचना

भर्ती प्रक्रिया के दौरान आरोपी ने तेलंगाना स्थित “प्रिंसटन इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी फॉर वुमेन” द्वारा जारी अनुभव प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया था। दस्तावेज में वर्ष 2014 से 2017 तक असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में कार्य करने का दावा किया गया था।

दस्तावेज सत्यापन बिलासपुर जोन की समिति के समक्ष हुआ, जहां आरोपी ने आईडीबीआई बैंक खाते से संबंधित वेतन भुगतान विवरण भी प्रस्तुत किया। बाद में संस्थान द्वारा सत्यापित वेतन भुगतान दस्तावेज भी समिति को सौंपे गए। इन दस्तावेजों के आधार पर 23 जनवरी 2024 को उसे पात्र घोषित कर दिया गया।

बैंक वेरिफिकेशन में खुला फर्जीवाड़ा

संचालनालय रोजगार एवं प्रशिक्षण द्वारा अभ्यर्थियों के बैंक स्टेटमेंट का सत्यापन संबंधित बैंक से कराने के निर्देश दिए गए थे। जांच के दौरान आईडीबीआई बैंक खाते के सत्यापन में बड़ा खुलासा हुआ।

13 नवंबर 2024 को हुई जांच में पाया गया कि आरोपी द्वारा प्रस्तुत बैंक स्टेटमेंट में जनवरी 2016 से दिसंबर 2016 के बीच कई महीनों की वेतन राशि फर्जी तरीके से दर्ज की गई थी। बैंक रिकॉर्ड और प्रस्तुत दस्तावेजों में भारी विसंगति मिलने के बाद अनुभव प्रमाण पत्र को संदिग्ध पाया गया।

जांच में स्पष्ट हुआ कि आरोपी ने अपने अनुभव को सही साबित करने के लिए कूटरचित दस्तावेज और फर्जी बैंक एंट्री का सहारा लिया था।

सेवा समाप्ति नोटिस के बाद दर्ज हुई FIR

मामला सामने आने के बाद आरोपी को कारण बताओ नोटिस जारी कर 7 दिनों के भीतर जवाब मांगा गया था। इसके बाद संयुक्त संचालक ए.के. सोनी की रिपोर्ट पर आरोपी के खिलाफ अपराध दर्ज कराया गया।

पुलिस ने आरोपी अनिकेत कर्ष के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(2), 336(3), 338 और 340(2) के तहत मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है।

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