(CG ई खबर | प्रमुख संपादक : ओम प्रकाश पटेल)
ग्रामीणों के मुताबिक ब्लास्टिंग के दौरान धरती तेज कंपन के साथ कांप उठती है। धमाकों की आवाज कई किलोमीटर दूर तक सुनाई देती है। लोगों का कहना है कि पहले छोटे-मोटे कंपन महसूस होते थे, लेकिन अब विस्फोट इतने तेज हो चुके हैं कि घरों की दीवारें तक हिलने लगती हैं। कई मकानों की छतों और दीवारों में लंबी दरारें साफ दिखाई देने लगी हैं। रहवासियों को डर है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो आने वाले समय में मकान ढहने जैसी घटनाएं भी सामने आ सकती हैं।
सबसे गंभीर बात यह है कि हैवी ब्लास्टिंग का असर अब जल स्रोतों पर भी साफ दिखाई देने लगा है। ग्रामीणों का आरोप है कि लगातार कंपन और खनन गतिविधियों के कारण इलाके का भूजल स्तर तेजी से प्रभावित हो रहा है। कई बोरवेल धंस चुके हैं, अनेक हैंडपंपों ने पानी देना बंद कर दिया है और कुओं का जलस्तर लगातार नीचे जा रहा है। इससे गेवरा बस्ती में भीषण जल संकट गहराता जा रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले जिन बोरवेलों से सालभर पानी मिलता था, वहां अब बूंद-बूंद पानी के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। महिलाएं और बच्चे दूर-दूर तक पानी लाने को मजबूर हैं। गर्मी बढ़ने के साथ हालात और भयावह होते जा रहे हैं। लोगों का आरोप है कि SECL करोड़ों टन कोयला निकालने में व्यस्त है, लेकिन आसपास रहने वाले लोगों की जिंदगी और मूलभूत सुविधाओं की ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा।
इस गंभीर समस्या को लेकर “सीजी ई खबर” द्वारा पहले भी आवाज उठाई गई थी और जनप्रतिनिधियों से अपेक्षा की गई थी कि वे SECL प्रबंधन के सामने ग्रामीणों की समस्या मजबूती से रखें। लेकिन बस्तीवासियों का आरोप है कि अब तक न तो हैवी ब्लास्टिंग पर नियंत्रण लगाने की कोई ठोस पहल हुई और न ही प्रभावित परिवारों को राहत देने की दिशा में कोई कार्रवाई दिखाई दी।
ग्रामीणों ने क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर भी सवाल उठाए हैं। लोगों का कहना है कि चुनाव के दौरान विकास और जनता की सुरक्षा की बातें करने वाले नेता अब बस्तीवासियों के डर, टूटते घरों और सूखते जल स्रोतों पर मौन हैं।
गेवरा बस्ती के लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि SECL कुसमुंडा की हैवी ब्लास्टिंग की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, प्रभावित मकानों का तत्काल सर्वे कराया जाए, धंसे बोरवेलों और खत्म हो रहे जल स्रोतों की भरपाई की जाए तथा बस्ती में स्थायी पेयजल व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो आने वाले दिनों में बड़ा जनआंदोलन किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और SECL प्रबंधन की होगी।

