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क्या यही सुशासन है? आश्वासन के दो दिन बाद ही नकटी गांव पर चला बुलडोज़र, 80 परिवार हुए बेघर


CG ई खबर | विशेष समाचार

छत्तीसगढ़। नकटी गांव में प्रशासन की कार्रवाई को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि 27 जून को ग्रामीणों को आश्वासन दिया गया था कि बरसात के मौसम में किसी भी परिवार का घर नहीं तोड़ा जाएगा। इस भरोसे के बाद लोगों ने राहत की उम्मीद जताई थी, लेकिन 29 जून की सुबह भारी पुलिस बल और प्रशासनिक अमले की मौजूदगी में गांव में बुलडोज़र चलाकर करीब 80 मकानों को ध्वस्त कर दिया गया।

ग्रामीणों का कहना है कि देखते ही देखते वर्षों की मेहनत से बने उनके आशियाने मलबे में तब्दील हो गए। बारिश के मौसम में घर टूटने से महिलाएं, बुजुर्ग और छोटे बच्चे खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हो गए हैं। प्रभावित परिवारों का आरोप है कि प्रशासन ने दिए गए आश्वासन का पालन नहीं किया।


इस कार्रवाई के बाद कई सवाल उठ रहे हैं—यदि बरसात में घर नहीं तोड़े जाने का भरोसा दिया गया था, तो फिर इतनी जल्द कार्रवाई क्यों की गई? विस्थापित परिवारों के पुनर्वास और वैकल्पिक व्यवस्था को लेकर भी स्थानीय लोगों ने चिंता जताई है।

ग्रामीणों का कहना है कि गरीब का घर तोड़ना आसान है, लेकिन उसके सपनों और जीवनभर की पूंजी की भरपाई कौन करेगा। उनका मानना है कि लोकतंत्र केवल प्रशासनिक कार्रवाई से नहीं, बल्कि जनता के विश्वास और मानवीय संवेदनाओं से मजबूत होता है।

CG ई खबर इस मामले में प्रशासन का पक्ष उपलब्ध होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित करेगा।

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