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ओमपुर के लिए स्वीकृत सोसायटी भवन का स्थल बदला, छुईढोड़ा में निर्माण पर विवाद


बिना अनुमति स्कूल की चारदीवारी तुड़वाने का आरोप, जनपद सीईओ ने निर्माण कार्य पर लगाई रोक

कोरबा। जनपद पंचायत कोरबा अंतर्गत ग्राम पंचायत रजगामार के आश्रित ग्राम ओमपुर में स्वीकृत नवीन शासकीय उचित मूल्य दुकान (सोसायटी भवन) के निर्माण को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और उपसरपंच ने आरोप लगाया है कि ओमपुर के लिए स्वीकृत भवन का निर्माण मनमाने ढंग से छुईढोड़ा में कराया जा रहा है। शिकायत के बाद जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने जांच पूरी होने तक निर्माण कार्य पर रोक लगा दी है।

स्कूल की चारदीवारी बिना अनुमति तुड़वाने का आरोप

मामले में सबसे गंभीर आरोप यह है कि निर्माण के लिए सरकारी स्कूल की चारदीवारी को बिना किसी सक्षम अनुमति के तुड़वा दिया गया। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इससे सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचा है और लाखों रुपये की क्षति होने की आशंका है।

ग्रामीणों ने सौंपा ज्ञापन, ओमपुर में ही निर्माण की मांग

ग्राम पंचायत की उपसरपंच पूनम चौरसिया, जनपद सदस्य उषा देवी कुर्रे सहित प्रभावित वार्ड पंचों एवं ग्रामीणों ने जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि सोसायटी भवन का निर्माण ओमपुर के मेन क्लब परिसर में कराया जाए, जहां पहले से इसकी मांग और स्वीकृति दी गई थी।

बिना सहमति बदल दिया निर्माण स्थल

शिकायत के अनुसार वार्ड क्रमांक 11 से 20 सहित प्रभावित क्षेत्रों के अधिकांश पंचों एवं ग्रामीणों की सहमति के बिना निर्माण स्थल बदल दिया गया। आरोप है कि वर्तमान में स्कूल के पीछे निजी किसान की भूमि के समीप निर्माण कराया जा रहा है, जिससे खाद्यान्न की सुरक्षा, आवागमन और बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो सकती है। ग्रामीणों का कहना है कि नया स्थल जनहित के अनुकूल नहीं है।

सीईओ का आदेश: जांच तक निर्माण पर रोक

मामले को गंभीर मानते हुए जनपद पंचायत कोरबा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी खगेश कुमार निर्मलकर ने सरपंच एवं सचिव को पत्र जारी कर स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जांच प्रतिवेदन प्राप्त होने और आगामी आदेश जारी होने तक निर्माण कार्य प्रारंभ न किया जाए।

भाजपा समर्थित वार्डों की उपेक्षा का आरोप

उपसरपंच पूनम चौरसिया ने आरोप लगाया कि वर्तमान सरपंच हरि सिंह राठिया भाजपा से जुड़े जनप्रतिनिधियों के वार्डों की लगातार उपेक्षा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ओमपुर में शासन द्वारा स्वीकृत दो आंगनबाड़ी भवनों का निर्माण भी अधूरा पड़ा है, जिससे बच्चों को भवन की सुविधा नहीं मिल रही है।

ग्राम सभा की कार्यवाही पर भी उठे सवाल

ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम सभा में बड़ी संख्या में लोगों ने निर्माण स्थल बदलने का विरोध किया था, लेकिन सचिव द्वारा ग्राम सभा की कार्यवाही पंजी में प्रस्ताव दर्ज नहीं किया गया। इससे ग्राम सभा की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।

विकास कार्यों में बाधा और भ्रष्टाचार के आरोप

उपसरपंच ने आरोप लगाया कि पंचायत कार्यकाल का डेढ़ वर्ष बीत जाने के बावजूद ओमपुर के विकास कार्यों में जानबूझकर बाधा डाली जा रही है। उन्होंने यह भी दावा किया कि 15वें वित्त आयोग एवं मूलभूत मद से राशि का आहरण किया गया, लेकिन कई कार्य धरातल पर दिखाई नहीं दे रहे हैं। इस संबंध में विभिन्न मामलों की जांच भी जारी बताई गई है।

पूर्व निर्माण कार्यों का भुगतान भी लंबित

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पूर्व कार्यकाल में कराए गए निर्माण कार्यों का भुगतान कलेक्टर के निर्देशों के बावजूद अब तक नहीं किया गया है। इससे पंचायत प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।

अब प्रशासनिक जांच पर टिकी निगाहें

सोसायटी भवन निर्माण स्थल परिवर्तन, स्कूल की चारदीवारी तोड़ने, विकास कार्यों में कथित भेदभाव और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों के बाद अब पूरे मामले में प्रशासनिक जांच और आगे की कार्रवाई पर ग्रामीणों की निगाहें टिकी हुई हैं।

नोट: इस समाचार में लगाए गए आरोप शिकायतकर्ताओं एवं जनप्रतिनिधियों द्वारा दिए गए आवेदन और बयानों पर आधारित हैं। मामले की जांच प्रशासन द्वारा की जा रही है तथा संबंधित पक्ष का आधिकारिक पक्ष सामने आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

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