बलरामपुर। छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में हर वर्ष गर्मी के मौसम के साथ गहराते जल संकट से निपटने के लिए प्रशासन और ग्रामीणों ने मिलकर एक अनूठी पहल शुरू की है। जिले में चलाए जा रहे “मोर गांव मोर पानी” अभियान के तहत बारिश की हर बूंद को संजोने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए किसानों के खेतों में बड़े पैमाने पर गड्ढे खोदे जा रहे हैं, ताकि वर्षा जल का संरक्षण हो सके और भू-जल स्तर में सुधार आए।
जिले के कई गांवों में हालात ऐसे हैं कि सैकड़ों फीट तक बोरवेल की खुदाई के बावजूद पानी नहीं निकलता। लगातार गिरते भू-जल स्तर के कारण गर्मी के दिनों में पेयजल संकट गंभीर रूप ले लेता है। इसी चुनौती को देखते हुए प्रशासन ने जल संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ते हुए अभियान को जनआंदोलन का स्वरूप दिया है।
अभियान की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें केवल ग्रामीण ही नहीं, बल्कि जिला प्रशासन के अधिकारी, जनप्रतिनिधि और स्वयं कलेक्टर तथा सांसद भी सक्रिय भागीदारी निभा रहे हैं। वे गांवों में पहुंचकर फावड़ा चलाते हुए लोगों को जल संरक्षण का संदेश दे रहे हैं। उनका कहना है कि आज पानी बचाने की दिशा में किया गया प्रयास आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित करेगा।
ग्रामीणों का भी इस अभियान को भरपूर समर्थन मिल रहा है। उनका कहना है कि हर साल पानी की कमी से खेती और दैनिक जीवन प्रभावित होता है। ऐसे में यदि वर्षा जल को जमीन में उतारने की व्यवस्था सफल होती है, तो आने वाले वर्षों में जलस्तर बढ़ेगा और पेयजल संकट से काफी हद तक राहत मिलेगी।
जिला प्रशासन का उद्देश्य केवल गड्ढे खोदना नहीं, बल्कि जल संरक्षण को जन-जागरूकता और जनभागीदारी का स्थायी अभियान बनाना है। यदि यह पहल सफल रही, तो बलरामपुर के सूखते जल स्रोतों में फिर से जीवन लौट सकता है और हजारों परिवारों को स्थायी राहत मिल सकती है। पानी की हर बूंद बचाने की यह मुहिम जिले के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर उभर रही है।

