कोरबा: लोन दिलाने के नाम पर लोगों से हजारों-लाखों रुपये की वसूली कर कार्यालय बंद कर फरार होने के मामले में पुलिस ने अभिवृद्धि फायनेंसियल सर्विस, टीपी नगर कोरबा के मैनेजर और एक महिला कर्मचारी के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। पुलिस मामले की जांच में जुट गई है।
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार प्रार्थिया स्मिता केंवट (30 वर्ष), निवासी ग्राम नोनबिर्रा, थाना करतला, ने शिकायत दर्ज कराई है कि मार्च 2026 से अब तक कंपनी के कर्मचारी प्रियंका कलसे और मैनेजर संजय सागर ने उससे 28,880 रुपये तथा अन्य कई लोगों से लाखों रुपये लोन दिलाने के नाम पर जमा कराए, लेकिन न तो लोन उपलब्ध कराया और न ही जमा राशि लौटाई। इसके बाद कार्यालय पर ताला लगाकर फरार हो गए।
गांव-गांव जाकर महिलाओं को दिया लोन का झांसा
शिकायत के अनुसार मार्च 2026 के पहले सप्ताह में कंपनी का एक कर्मचारी ग्राम नोनबिर्रा पहुंचा और महिलाओं को कम ब्याज पर लोन दिलाने का दावा किया। अनुसूचित जनजाति वर्ग की महिलाओं को विशेष योजना के तहत ₹1.75 लाख तक का ऋण मिलने की बात कहकर आवेदन भरवाए गए।
स्मिता केंवट ने 14 मार्च 2026 को 4 लाख रुपये के लोन के लिए आवेदन किया और प्रारंभिक शुल्क के रूप में 1,000 रुपये जमा किए। बाद में कंपनी के कर्मचारियों ने सर्वे के बाद बताया कि लोन स्वीकृति के लिए सीएमए और डीपीआर शुल्क जमा करना होगा।
11 मई 2026 को स्मिता ने अपने पति दिनेश केंवट के बैंक खाते से फोन-पे के माध्यम से 28,880 रुपये प्रियंका कलसे के मोबाइल नंबर पर ट्रांसफर किए। कर्मचारियों ने आश्वासन दिया कि 12 दिनों के भीतर लोन की राशि खाते में आ जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
कई ग्रामीणों से भी वसूली
शिकायत में बताया गया है कि गांव के कई अन्य लोगों से भी अलग-अलग राशि वसूली गई। इनमें संजू भट्ट, प्रीति महंत, किरण महंत, गीताबाई महंत, गीताबाई केंवट, रतनीबाई, विजय कुमारी, रेवती बाई बिंझवार, उषा बिंझवार, गीताबाई बिंझवार, गायत्रीबाई और कुमुदनी बाई सहित कई लोगों से 15 हजार से 36 हजार रुपये तक लिए गए।
8 जुलाई को सभी पीड़ित अपनी राशि वापस लेने या लोन की जानकारी के लिए कंपनी के कार्यालय पहुंचे, लेकिन वहां कार्यालय बंद मिला। इसके बाद पीड़ितों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस ने दर्ज किया मामला
स्मिता केंवट की शिकायत पर पुलिस ने अभिवृद्धि फायनेंसियल सर्विस, टीपी नगर कोरबा की कर्मचारी प्रियंका कलसे (निवासी प्रगति नगर, दर्री) और मैनेजर संजय सागर के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 3(5) एवं 318(4) के तहत अपराध दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है। पुलिस पूरे मामले में अन्य पीड़ितों और लेन-देन की भी जांच कर रही है।


