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क्या मितानिन ही सुईन होती है? अक्सर लोग कर देते हैं दोनों को एक, जानिए असली फर्क


CG ई खबर | संपादक : ओम प्रकाश पटेल

सुईन और मितानिन एक नहीं हैं, फिर भी लोग क्यों समझ लेते हैं एक जैसा? जानिए पूरा सच

ग्रामीण क्षेत्रों में वर्षों से चली आ रही परंपरा और स्वास्थ्य सेवाओं की बदलती व्यवस्था के कारण दोनों की पहचान को लेकर बना भ्रम।

छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में अक्सर सुईन और मितानिन को एक ही माना जाता है, जबकि वास्तविकता में दोनों की भूमिका, जिम्मेदारियां और कार्यप्रणाली अलग-अलग हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार मितानिन एक प्रशिक्षित सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता होती है, जबकि सुईन पारंपरिक रूप से प्रसव कराने वाली महिला के रूप में जानी जाती रही है।

क्या है सुईन की भूमिका?
सुईन पहले गांवों में घर पर होने वाले प्रसव कराती थीं। यह कार्य उनके अनुभव और परंपरागत ज्ञान पर आधारित होता था। वर्तमान में सरकार सुरक्षित मातृत्व को बढ़ावा देने के लिए अस्पतालों में संस्थागत प्रसव को प्राथमिकता दे रही है, जिससे सुईन की भूमिका पहले की तुलना में काफी सीमित हो गई है।

मितानिन क्या करती है?
मितानिन राज्य सरकार द्वारा चयनित एवं प्रशिक्षित स्वास्थ्य कार्यकर्ता होती है। वह गर्भवती महिलाओं का पंजीयन, प्रसव पूर्व एवं प्रसव बाद देखभाल, टीकाकरण, पोषण संबंधी जागरूकता, नवजात एवं बच्चों के स्वास्थ्य की निगरानी, परिवार नियोजन की जानकारी तथा जरूरतमंद मरीजों को स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाने में सहयोग करती है। मितानिन स्वयं प्रसव कराने के लिए नियुक्त नहीं होती।

फिर दोनों को एक क्यों समझा जाता है?

ग्रामीण क्षेत्रों में कई लोग आज भी प्रसव और मातृ-शिशु स्वास्थ्य से जुड़े हर कार्य को एक ही नजरिए से देखते हैं। पहले गांवों में सुईन ही प्रसव से जुड़ी प्रमुख महिला होती थीं। बाद में जब मितानिन व्यवस्था शुरू हुई तो लोगों ने उन्हें भी उसी भूमिका से जोड़कर देखना शुरू कर दिया। कई बार मितानिन गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचाने, प्रसव के समय सहयोग करने और परिवार के साथ रहने का काम करती हैं। इसी कारण लोगों में यह धारणा बन गई कि मितानिन और सुईन एक ही हैं।

इसके अलावा कुछ स्थानों पर पहले सुईन का कार्य करने वाली महिलाओं ने बाद में मितानिन के रूप में भी काम करना शुरू किया, जिससे यह भ्रम और गहरा हो गया। हालांकि प्रशासनिक और स्वास्थ्य व्यवस्था में दोनों की जिम्मेदारियां स्पष्ट रूप से अलग निर्धारित हैं।

मुख्य अंतर

  • सुईन: पारंपरिक अनुभव के आधार पर प्रसव कराने वाली महिला।

  • मितानिन: सरकार द्वारा प्रशिक्षित सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता।

  • सुईन का कार्य: पारंपरिक प्रसव कराना।

  • मितानिन का कार्य: स्वास्थ्य जागरूकता, मातृ-शिशु देखभाल, टीकाकरण, पोषण एवं स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच सुनिश्चित करना।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को सुईन और मितानिन की अलग-अलग भूमिका के बारे में जागरूक करने की आवश्यकता है, ताकि किसी प्रकार का भ्रम न रहे और गर्भवती महिलाओं को समय पर सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।

— CG ई खबर
संपादक : ओम प्रकाश पटेल

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