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छत्तीसगढ़ में मदरसा बोर्ड को भंग करने की मांग तेज, वक्फ बोर्ड अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र


रायपुर।
छत्तीसगढ़ में मदरसा बोर्ड को लेकर एक नई बहस शुरू हो गई है। छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर उत्तराखंड की तर्ज पर प्रदेश के मदरसा बोर्ड को समाप्त करने की मांग की है।

अपने पत्र में डॉ. सलीम राज ने कहा है कि राज्य सरकार हर वर्ष मदरसा बोर्ड को अनुदान देती है, लेकिन अधिकांश संस्थानों में केवल दीनी (धार्मिक) शिक्षा पर ही जोर दिया जाता है। उनका तर्क है कि बदलते समय के साथ अल्पसंख्यक समुदाय के बच्चों को आधुनिक एवं रोजगारोन्मुख शिक्षा भी मिलनी चाहिए, ताकि वे प्रतिस्पर्धी दौर में बेहतर अवसर प्राप्त कर सकें।

इस मांग पर राज्य सरकार का कहना है कि मामले से जुड़े सभी तथ्यों का परीक्षण कराया जाएगा। परीक्षण रिपोर्ट के आधार पर ही आगे कोई निर्णय लिया जाएगा।

वहीं, विपक्ष ने इस प्रस्ताव का विरोध करते हुए कहा है कि मदरसा बोर्ड को भंग करने की सोच असंवैधानिक है और सरकार को ऐसा कोई कदम उठाने से पहले सभी पक्षों से व्यापक चर्चा करनी चाहिए।

गौरतलब है कि हाल ही में सरकार ने 1 जुलाई 2026 से राज्य मदरसा बोर्ड को समाप्त कर नई इकाई उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण (USMEA) के गठन का निर्णय लिया है। यह प्राधिकरण मुस्लिम समुदाय के साथ-साथ सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन और पारसी समुदाय के अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों की निगरानी करेगा।

बताया जाता है कि छत्तीसगढ़ में 450 से अधिक पंजीकृत मदरसे संचालित हैं। यदि राज्य सरकार भविष्य में मदरसा बोर्ड को लेकर कोई नई व्यवस्था लागू करती है, तो उसका प्रभाव इन संस्थानों, वहां अध्ययनरत विद्यार्थियों तथा शिक्षकों पर पड़ सकता है।

फिलहाल यह मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है। अब सभी की निगाहें राज्य सरकार के परीक्षण और उसके बाद लिए जाने वाले संभावित निर्णय पर टिकी हैं।

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