विवादित वीडियो हटाकर सार्वजनिक रूप से मांग चुके हैं माफी, लेकिन भाजपा की शिकायत पर सिविल लाइंस थाने में दर्ज हुआ मामला; BNS की चार धाराओं सहित IT एक्ट की धारा 67 के तहत अपराध पंजीबद्ध
रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री स्वर्गीय अजीत जोगी के पुत्र एवं जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के प्रदेश अध्यक्ष अमित जोगी के खिलाफ रायपुर के सिविल लाइंस थाने में एफआईआर दर्ज की गई है। मामला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक कथित आपत्तिजनक व्यंग्यात्मक वीडियो से जुड़ा है। भाजपा नेताओं की शिकायत के बाद पुलिस ने अमित जोगी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत अपराध पंजीबद्ध किया है।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, अमित जोगी ने कथित वोट चोरी के मुद्दे को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधते हुए सोशल मीडिया पर एक व्यंग्यात्मक वीडियो साझा किया था।
वीडियो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के मुखौटे पहने प्रतीकात्मक किरदार दिखाई दिए। इसके बाद 'ज्ञानू-जानू की शादी' के नाम से सांकेतिक विवाह और हनीमून के दृश्य प्रस्तुत किए गए। वीडियो की इस प्रस्तुति को लेकर सोशल मीडिया पर विवाद शुरू हो गया।
भाजपा नेताओं और समर्थकों ने वीडियो को आपत्तिजनक बताते हुए कड़ी नाराजगी जाहिर की। देखते ही देखते यह मामला राजनीतिक विवाद में बदल गया और अमित जोगी के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठने लगी।
विवाद बढ़ा तो अमित जोगी ने हटाया वीडियो, मांगी सार्वजनिक माफी
वीडियो को लेकर बढ़ते विरोध के बीच अमित जोगी ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट हटा दी। इसके बाद उन्होंने एक अन्य पोस्ट के माध्यम से सार्वजनिक रूप से माफी भी मांगी।
अमित जोगी ने स्वीकार किया कि अपनी बात रखने का उनका तरीका उचित नहीं था। उन्होंने कहा कि जिस संदेश को वह लोगों तक पहुंचाना चाहते थे, उसे किसी दूसरे तरीके से भी रखा जा सकता था।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अपनी बात रखने के लिए स्वयं का मजाक उड़ाना अलग बात है, लेकिन किसी के निजी रिश्ते या निजी जीवन को व्यंग्य का हिस्सा बनाना ऐसी सीमा है, जिसे वह पार नहीं करना चाहते। इसी कारण उन्होंने विवादित पोस्ट हटाई और जिन लोगों की भावनाएं आहत हुईं, उनसे माफी मांगी।
भाजपा विधायक राजेश मूणत के नेतृत्व में थाने पहुंचे नेता
अमित जोगी की माफी के बावजूद भाजपा का विरोध थमा नहीं। रायपुर पश्चिम के भाजपा विधायक राजेश मूणत के नेतृत्व में भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने रायपुर के सिविल लाइंस थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई और कानूनी कार्रवाई की मांग की।
भाजपा नेताओं का आरोप था कि वीडियो के माध्यम से देश के प्रधानमंत्री और मुख्य चुनाव आयुक्त की छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया गया है। भाजपा ने केवल वीडियो साझा करने वाले ही नहीं, बल्कि उसकी पटकथा तैयार करने, शूटिंग करने और उसमें भूमिका निभाने वाले लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग उठाई।
विधायक राजेश मूणत ने इस वीडियो की प्रस्तुति पर आपत्ति जताते हुए कहा कि राजनीति में विचारों और सिद्धांतों की लड़ाई होनी चाहिए, लेकिन किसी के चरित्र और निजी जीवन को लेकर इस प्रकार की प्रस्तुति उचित नहीं है।
भाजपा नेताओं ने पुलिस प्रशासन से 24 घंटे के भीतर कार्रवाई करने की मांग भी की थी।
इन धाराओं के तहत दर्ज हुआ अपराध
भाजपा रायपुर जिलाध्यक्ष रमेश सिंह ठाकुर की शिकायत पर अमित जोगी के खिलाफ सिविल लाइंस थाने में एफआईआर दर्ज की गई है।
मीडिया रिपोर्टों में दर्ज एफआईआर के अनुसार, निम्नलिखित धाराएं लगाई गई हैं:
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भारतीय न्याय संहिता की धारा 196 – विभिन्न समूहों के बीच वैमनस्य को बढ़ावा देने तथा सामाजिक सद्भाव के प्रतिकूल कृत्यों से संबंधित प्रावधान।
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धारा 352 – शांति भंग कराने के इरादे से जानबूझकर अपमान करने से संबंधित प्रावधान।
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धारा 353(2) – सार्वजनिक उपद्रव से संबंधित बयानों और उनके प्रसार से जुड़ा प्रावधान।
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धारा 356(2) – मानहानि से संबंधित प्रावधान।
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सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 67 – इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से अश्लील सामग्री प्रकाशित या प्रसारित करने से संबंधित प्रावधान।
इन धाराओं के तहत पुलिस मामले की जांच करेगी और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
भाजपा नेताओं की बयानबाजी से भी बढ़ा था विवाद
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान भाजपा नेताओं ने अमित जोगी पर तीखे राजनीतिक हमले किए थे। राज्य मंत्री दर्जा प्राप्त छत्तीसगढ़ राज्य केश शिल्पी कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष ने भी सोशल मीडिया पर अमित जोगी के खिलाफ तीखी टिप्पणी करते हुए उनके मानसिक स्वास्थ्य और कथित नशे को लेकर व्यक्तिगत आरोप लगाए थे।
इस तरह वीडियो विवाद केवल कानूनी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि भाजपा और जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ के बीच राजनीतिक बयानबाजी का मुद्दा भी बन गया।
अब आगे क्या होगा?
फिलहाल अमित जोगी के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद मामला पुलिस जांच के दायरे में है। पुलिस वीडियो, सोशल मीडिया पोस्ट, शिकायत में लगाए गए आरोपों और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच करेगी।
अमित जोगी द्वारा विवादित वीडियो हटाकर माफी मांगना भी इस घटनाक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन पोस्ट हटाने या माफी मांगने मात्र से दर्ज एफआईआर स्वतः समाप्त नहीं होती। मामले में आगे क्या कार्रवाई होगी, यह जांच और कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।
राजनीतिक सवाल भी खड़े
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर राजनीतिक अभिव्यक्ति की मर्यादा, सोशल मीडिया पर व्यंग्य की सीमाओं और सार्वजनिक पदों पर बैठे व्यक्तियों के प्रति राजनीतिक आलोचना के तरीके को लेकर बहस छेड़ दी है।
अब देखना होगा कि पुलिस जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और अमित जोगी इस कानूनी कार्रवाई को लेकर आगे क्या कदम उठाते हैं।
संपादकीय टिप्पणी: एफआईआर दर्ज होना किसी व्यक्ति का अपराध सिद्ध होना नहीं है। अमित जोगी के खिलाफ लगाए गए आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।



