तीन दिवसीय कलमबंद–कामबंद आंदोलन शुरू, स्कूलों व दफ्तरों में सन्नाटा
(CG ई खबर | बिलासपुर संभाग ब्यूरो चीफ : विजय चौहान)
गौरेला–पेण्ड्रा–मरवाही।
छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के आह्वान पर प्रदेशभर में सोमवार से तीन दिवसीय ‘कलमबंद–कामबंद’ हड़ताल की शुरुआत हो गई है। हड़ताल के पहले ही दिन जिले के अधिकांश शासकीय कार्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों में कामकाज पूरी तरह ठप रहा। हजारों अधिकारी-कर्मचारी अपने कार्यस्थलों से दूर रहकर ज्योतिपुर, पेण्ड्रारोड स्थित धरना स्थल पर एकत्रित हुए और सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया।
“मोदी की गारंटी” पर उठे सवाल
कर्मचारी नेताओं ने आरोप लगाया कि वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा द्वारा “मोदी की गारंटी” के तहत केंद्र के समान महंगाई भत्ता (डीए) देने सहित कई मांगें पूरी करने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन सरकार बनने के बाद भी इन वादों पर अमल नहीं हुआ।
नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि शासन-प्रशासन ने जल्द ही प्रदेश पदाधिकारियों से बातचीत कर समाधान नहीं निकाला, तो आंदोलन और उग्र किया जाएगा, जिसका सीधा असर आम जनता पर पड़ेगा।
पूर्व सरकारों से भी नाराज़गी
कर्मचारी संगठनों ने कहा कि पूर्ववर्ती भूपेश बघेल सरकार द्वारा भी लंबे समय तक डीए बकाया रोके जाने से कर्मचारियों में भारी असंतोष था, जिसने सत्ता परिवर्तन में भी भूमिका निभाई। नेताओं का कहना है कि सरकारी योजनाओं को ज़मीन पर उतारने वाले कर्मचारियों के साथ वादाखिलाफी किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है।
फेडरेशन की प्रमुख मांगें
हड़ताली कर्मचारियों की मुख्य मांगें इस प्रकार हैं—
- केंद्र सरकार के समान महंगाई भत्ता (डीए) लागू कर बकाया राशि जीपीएफ खाते में जमा की जाए।
- चार स्तरीय वेतनमान प्रणाली लागू की जाए।
- पिंगुआ कमेटी की रिपोर्ट सार्वजनिक कर वेतन विसंगतियां दूर की जाएं।
- पंचायत सचिवों का शासकीयकरण किया जाए।
- सभी विभागों में सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाकर 65 वर्ष की जाए।
- दैनिक वेतनभोगी, संविदा एवं अनियमित कर्मचारियों के नियमितीकरण हेतु ठोस नीति बनाई जाए।
नेतृत्व और आयोजन
धरना-प्रदर्शन में जिला संयोजक डॉ. संजय शर्मा सहित सैकड़ों अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन अजय चौधरी ने किया। फेडरेशन ने स्पष्ट किया कि यह हड़ताल 31 दिसंबर तक जारी रहेगी।

