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श्रम शोषण के खिलाफ चिंगारी: सराईपाली खदान में 9 जनवरी को भड़केगा आंदोलन


(CG ई खबर | बिलासपुर संभाग ब्यूरो चीफ : विजय चौहान)

कोरबा, 03 जनवरी 2026।
सराईपाली खुली खदान में कार्यरत ठेका श्रमिकों के कथित व्यापक श्रम शोषण के विरोध में कोयला मजदूर पंचायत (एचएमएस) ने 9 जनवरी 2026 को धरना-प्रदर्शन एवं आंदोलन की चेतावनी दी है। संगठन का आरोप है कि ठेका कंपनी विनय कुमार उपाध्याय द्वारा श्रमिकों को निर्धारित कानूनी वेतन से काफी कम भुगतान किया जा रहा है और नियमों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है।

केंद्र में ये गंभीर मुद्दे

  • कम वेतन भुगतान: श्रमिकों को शासन द्वारा तय दर से कम मजदूरी दी जा रही है।
  • मनमानी कार्रवाई: बिना कारण श्रमिकों को बार-बार काम से बैठाया जा रहा है।
  • कानूनी सुविधाओं का अभाव: वेतन पर्ची, पहचान पत्र, नियुक्ति पत्र एवं सीएमपीएफ जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं दी जा रही हैं।

संघर्ष का नेतृत्व

इस प्रस्तावित आंदोलन का नेतृत्व कोयला मजदूर पंचायत (एचएमएस) के केंद्रीय उपाध्यक्ष गजेंद्र पाल सिंह तंवर कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि श्रमिकों की समस्याओं को लेकर एसईसीएल कोरबा क्षेत्र के महाप्रबंधक को ज्ञापन सौंपा गया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। मजबूरन संगठन को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ रहा है।

श्रमिकों की प्रमुख मांगें

संगठन द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में निम्न मांगें प्रमुख रूप से रखी गई हैं—

  • पुनर्बहाली एवं बकाया भुगतान: पूर्व में कार्यरत ड्राइवरों एवं ऑपरेटरों की बहाली तथा सभी श्रमिकों को कम भुगतान किए गए वेतन का बकाया सहित भुगतान।
  • दस्तावेजीकरण: सभी श्रमिकों को वेतन पर्ची, पहचान पत्र एवं नियुक्ति पत्र उपलब्ध कराया जाए।
  • सामाजिक सुरक्षा: सभी श्रमिकों को सीएमपीएफ का सदस्य बनाया जाए और पूर्व की गई कटौती का पूरा हिसाब दिया जाए।
  • कानूनी अनुपालन: निर्धारित फॉर्म में टाइम ऑफिस में हाजिरी एवं नियमानुसार अवकाश सुनिश्चित किया जाए।
  • अवैध कैंप पर रोक: कंपनी द्वारा संचालित कथित अवैध कैंप को तत्काल बंद किया जाए।

लंबे संघर्ष की एक और कड़ी

गौरतलब है कि सराईपाली खदान में श्रमिकों एवं प्रभावितों का संघर्ष नया नहीं है। वर्ष 2020 में बुड़बुड़ परियोजना के विस्थापितों ने रोजगार व मुआवजे को लेकर अनिश्चितकालीन आंदोलन की घोषणा की थी। वहीं, सितंबर 2025 में भी गजेंद्र पाल सिंह तंवर के नेतृत्व में प्रभावित गांवों में बड़ी बैठक आयोजित कर बहाली और रोजगार को लेकर चेतावनी दी गई थी। वर्तमान आंदोलन उसी लंबे संघर्ष की नवीनतम कड़ी माना जा रहा है।

आगे की राह

कोयला मजदूर पंचायत (एचएमएस) ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि 9 जनवरी को होने वाले धरना-प्रदर्शन से पहले समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो इसके बाद की पूरी जिम्मेदारी एसईसीएल कोरबा प्रबंधन की होगी। श्रमिकों का कहना है कि लिखित शिकायतों से जब कोई परिणाम नहीं निकला, तो आंदोलन ही अब उनका अंतिम विकल्प है।

अब देखना यह होगा कि स्थानीय प्रशासन और एसईसीएल प्रबंधन इस चेतावनी को कितनी गंभीरता से लेते हैं और श्रम कानूनों के अनुपालन के जरिए संभावित आंदोलन को टालने के लिए क्या कदम उठाते हैं।

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