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CISF की सुरक्षा और आचरण पर उठते सवाल: कोरबा की खदानों में जवानों पर दुर्व्यवहार और संरक्षित चोरी के गंभीर आरोप


(CG ई खबर | बिलासपुर संभाग ब्यूरो चीफ)

कोरबा-दीपका। दक्षिण-पूर्वी कोयला क्षेत्र लिमिटेड (एसईसीएल) की राष्ट्रीय महत्व की कोयला खदानों की सुरक्षा में तैनात केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) की कार्यप्रणाली पर कोरबा जिले में गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो गए हैं। एक ओर जहां ग्रामीणों, भूविस्थापितों और आम नागरिकों के साथ दुर्व्यवहार व हिंसा के आरोप सामने आ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर खदान परिसरों के भीतर करोड़ों रुपये की सरकारी संपत्ति की चोरी बेरोकटोक जारी होने की बातें कही जा रही हैं।

स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि सुरक्षा व्यवस्था का दायित्व संभालने वाला बल का एक वर्ग अपने कर्तव्यों से भटककर भ्रष्टाचार और उत्पीड़न का प्रतीक बनता जा रहा है, जिससे क्षेत्र में असंतोष लगातार गहराता जा रहा है।


श्रमिक चौक पर आम नागरिकों से कथित दुर्व्यवहार

रेंकी, सुवाभोड़ी, चैनपुर, हरदीबाजार सहित दर्जनों गांवों को जोड़ने वाले मुख्य मार्ग श्रमिक चौक पर CISF जवानों द्वारा आम नागरिकों के साथ कठोर व्यवहार किए जाने के आरोप लगाए जा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गाली-गलौज, अनावश्यक पूछताछ और बेवजह रोके जाने से स्कूली बच्चों, मरीजों, कामगारों और ग्रामीणों की आवाजाही बाधित हो रही है।


खदान के भीतर सुरक्षा तंत्र पर सवाल

ग्रामीणों का आरोप है कि आम लोगों पर सख्ती दिखाने वाले जवान खदानों की वास्तविक सुरक्षा में असफल नजर आ रहे हैं। आरोपों के अनुसार खदान परिसरों से बड़े पैमाने पर डीजल, मशीनी कबाड़, लोहा और अन्य कीमती उपकरणों की संगठित चोरी हो रही है। स्थानीय लोगों का मानना है कि बिना किसी “मौन समर्थन” या मिलीभगत के इतने बड़े स्तर पर चोरी संभव नहीं हो सकती।


हाल की घटनाएं जो आरोपों को देती हैं बल

1. भूविस्थापितों पर लाठीचार्ज (हालिया घटना)
रोजगार और मुआवजे की मांग को लेकर गेवरा खदान के बाहर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे भूविस्थापितों पर CISF जवानों द्वारा लाठीचार्ज किए जाने का आरोप है। इस घटना में चार प्रदर्शनकारी गंभीर रूप से घायल हुए, जिसके बाद खदान का मुख्य द्वार जाम हो गया। वहीं, एसईसीएल प्रबंधन का कहना है कि काम में बाधा डालने वालों को नियंत्रित किया गया।

2. खदान परिसर में हिंसक झड़प (4 जनवरी 2026)
गेवरा खदान के भीतर कोयला लिफ्टिंग को लेकर दो निजी कंपनियों के गुटों के बीच CISF की मौजूदगी में हिंसक झड़प हुई। इसमें दो लोग गंभीर रूप से घायल हुए। दोनों पक्षों के खिलाफ मामला दर्ज कर 12 लोगों को आरोपी बनाया गया। यह घटना खदानों में सुरक्षा नियंत्रण पर सवाल खड़े करती है।

3. डीजल चोरी गिरोह का खुलासा
कोरबा पुलिस ने हाल ही में एसईसीएल खदानों से डीजल चोरी करने वाले एक बड़े गिरोह का भंडाफोड़ किया। कार्रवाई में 2,345 लीटर चोरी का डीजल और खदान प्रवेश पास लगी गाड़ियां जब्त की गईं। पुलिस ने CISF की संदिग्ध भूमिका की ओर इशारा करते हुए एसईसीएल को पत्र लिखा है। इसी कड़ी में मिलीभगत के आरोप में 6 पुलिसकर्मियों को निलंबित भी किया गया।

4. माइनिंग अधिकारी की गलत पहचान में पिटाई (लगभग 3 वर्ष पूर्व)
दीपका परियोजना में CISF जवानों द्वारा एक माइनिंग अधिकारी को डीजल चोर समझकर बंधक बनाने और पिटाई करने का मामला भी सामने आ चुका है। इस घटना के बाद एसईसीएल कर्मचारियों में आक्रोश फैल गया था और हालात बिगड़ते-बिगड़ते सुलह के बाद शांत हुए थे।


पुरानी लेकिन गहराती समस्या

खदानों में चोरी और सुरक्षा में चूक की समस्या नई नहीं है। करीब एक दशक पूर्व भी रिपोर्टों में सामने आया था कि एसईसीएल प्रतिमाह करोड़ों रुपये CISF को सुरक्षा शुल्क के रूप में देता था, इसके बावजूद कोयला, डीजल और उपकरणों की चोरी जारी थी। उस समय भी सुरक्षा कर्मियों और पुलिस को ‘नजराना’ देकर चोरी किए जाने के आरोप लगे थे। आज यह समस्या और अधिक विकराल होती दिख रही है।


CISF: प्रतिष्ठा और जिम्मेदारी

CISF एक प्रतिष्ठित केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल है, जिसकी स्थापना 1968 में संसद के अधिनियम के तहत की गई थी। यह बल देशभर में 361 से अधिक रणनीतिक प्रतिष्ठानों, 70 हवाई अड्डों, परमाणु संयंत्रों और संसद भवन सहित महत्वपूर्ण संस्थानों की सुरक्षा करता है। इसका आदर्श वाक्य “सुरक्षा और संरक्षा” है। कोरबा में लग रहे आरोप इसी विश्वास और प्रतिष्ठा को आघात पहुंचा रहे हैं।


ग्रामीणों की मांग और आगे की चुनौती

क्षेत्र के ग्रामीणों और आंदोलनकारियों ने एसईसीएल प्रबंधन और प्रशासन से मांग की है कि—

  • ग्रामीणों से दुर्व्यवहार करने वाले CISF जवानों पर कड़ी कार्रवाई हो।
  • खदानों में हो रही संगठित चोरी की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच कराई जाए।
  • आम नागरिकों के लिए सार्वजनिक मार्गों पर निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित की जाए।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो व्यापक आंदोलन की स्थिति बन सकती है। ऐसे में प्रशासन और एसईसीएल प्रबंधन के सामने चुनौती है कि वे न केवल खदानों की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करें, बल्कि सुरक्षा बल के आचरण पर नियंत्रण रखते हुए जनता का विश्वास भी बहाल करें।

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