प्रबंधन–ग्रामीणों के बीच त्रिपक्षीय वार्ता सफल
लिखित आश्वासन के बाद 10 फरवरी का आंदोलन स्थगित
गेवरा/कोरबा : मठ की मुआवजा राशि के भुगतान एवं पीएनसी कंपनी में वैकल्पिक रोजगार की जायज मांगों को लेकर आंदोलनरत नराईबोध ग्राम के ग्रामीणों और एसईसीएल (SECL) गेवरा प्रबंधन के बीच चली लंबी खींचतान आखिरकार सकारात्मक निष्कर्ष पर पहुंच गई है। प्रबंधन द्वारा मांगों पर लिखित में ठोस आश्वासन दिए जाने के बाद ग्रामीणों ने पूर्व घोषित 10 फरवरी का आंदोलन फिलहाल स्थगित करने का निर्णय लिया है।
बैठक का मुख्य विवरण
सोमवार 9 फरवरी की शाम 6 बजे गेवरा सभागार में एक महत्वपूर्ण त्रिपक्षीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें एसईसीएल गेवरा प्रबंधन, पीएनसी कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी तथा नराईबोध ग्राम के प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक के दौरान ग्रामीणों की समस्याओं और मांगों पर गंभीरता से चर्चा की गई।
बैठक में बनी प्रमुख सहमतियां
- रोजगार पर सहमति – पीएनसी कंपनी द्वारा प्रबंधन की अनुशंसा पर एक सप्ताह के भीतर तीन स्थानीय ग्रामीणों को प्राथमिकता के आधार पर वैकल्पिक रोजगार उपलब्ध कराने पर सहमति बनी।
- भविष्य में प्राथमिकता – भविष्य में रोजगार के नए अवसर सृजित होने पर योग्यता एवं उपलब्धता के आधार पर ग्रामवासियों को प्राथमिकता दी जाएगी।
- लिखित आश्वासन – बैठक उपरांत संबंधित अधिकारियों द्वारा हस्ताक्षरित लिखित सहमति पत्र ग्रामीण प्रतिनिधियों को सौंपा गया, जिसके बाद आंदोलन स्थगन की घोषणा की गई।
ग्रामीणों की दो टूक चेतावनी
हालांकि फिलहाल आंदोलन स्थगित किया गया है, लेकिन नराईबोध के ग्रामीणों ने प्रबंधन को स्पष्ट चेतावनी भी दी है। ग्रामीणों का कहना है—
“हमने प्रबंधन के लिखित आश्वासन पर भरोसा जताते हुए आंदोलन टाला है। यदि तय समय-सीमा में मांगों को पूरा नहीं किया गया या आश्वासन की अनदेखी हुई, तो आगामी समय में एसईसीएल गेवरा खदान का संचालन पूरी तरह ठप कर दिया जाएगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी।”
उपस्थिति
इस त्रिपक्षीय वार्ता में ग्राम प्रतिनिधि गोमती केवट सहित अन्य प्रमुख ग्रामीण उपस्थित रहे, जिन्होंने क्षेत्र के अधिकारों और स्थानीय हितों की आवाज को मजबूती से रखा।












