(CG ई खबर | जिला संवाददाता: नारायण चंद्राकर)
कोरबा जिले में इस माह उचित मूल्य की दुकानों में चावल का समय पर भंडारण नहीं होने से सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) बुरी तरह प्रभावित हुई है। फरवरी का चावल 20 दिन बीतने के बाद भी कई दुकानों तक नहीं पहुंच सका, जिससे राशनकार्डधारियों को रोजाना भटकना पड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार जिले की 553 राशन दुकानों के माध्यम से करीब 3 लाख 57 हजार राशनकार्डधारियों को चावल, चना, शक्कर और नमक वितरित किया जाता है। लेकिन करीब 100 से अधिक दुकानों में अब तक चावल पहुंचा ही नहीं, वहीं कई दुकानों में आधे से भी कम हितग्राहियों को ही चावल मिल पाया है।
टेंडर में देरी बनी बड़ी वजह
हर माह वितरण से एक माह पूर्व भंडारण की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। इस बार फोर्टिफाइड चावल के टेंडर समय पर नहीं होने के कारण मिलरों ने नान (NAN) के गोदामों में चावल जमा नहीं किया, जिसका सीधा असर दुकानों तक आपूर्ति पर पड़ा।
लैप्स होने का डर, हितग्राही परेशान
नियमों के अनुसार राशन महीने के भीतर ही उठाना अनिवार्य होता है, अन्यथा वह अपने आप लैप्स हो जाता है। देरी के चलते कई परिवारों को चावल मिलने पर संशय बना हुआ है, जिससे उनकी चिंता बढ़ गई है।
हर माह 1.20 लाख क्विंटल की जरूरत
जिले में हर महीने करीब 1 लाख 20 हजार क्विंटल चावल की आवश्यकता होती है, जबकि इस बार आधे से भी कम भंडारण हो सका। गोदामों में चावल देरी से पहुंचने के कारण दुकानों तक आपूर्ति बाधित रही।
अधिकारियों का दावा
खाद्य विभाग के अनुसार,
दो दिन के भीतर सभी दुकानों में चावल का भंडारण कर लिया जाएगा।
वितरण व्यवस्था पर कड़ी निगरानी के लिए नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की गई है, ताकि हितग्राहियों को परेशानी न हो।
— जी.एस. कंवर, खाद्य अधिकारी
निष्कर्ष: प्रशासन के आश्वासन के बावजूद जमीनी स्तर पर तत्काल आपूर्ति बहाल करना और लैप्स की आशंका दूर करना जरूरी है, ताकि गरीब और जरूरतमंद परिवारों को राहत मिल सके।











