छत्तीसगढ़ | रायपुर (CG ई खबर) में राज्यसभा की दो सीटों को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां अपने चरम पर हैं। चुनाव की अधिसूचना से पहले ही दलों ने अंदरूनी रणनीति तेज कर दी है। इसी कड़ी में पूर्व मुख्यमंत्री के एक बयान ने सियासी चर्चाओं की दिशा बदल दी—उन्होंने साफ कर दिया कि वे राज्यसभा की रेस में शामिल नहीं होंगे। दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी ने सामाजिक-क्षेत्रीय संतुलन साधते हुए 7 संभावित नामों का पैनल केंद्रीय नेतृत्व को भेज दिया है।
भूपेश का स्पष्ट संदेश: विधायक के तौर पर रहूंगा
भूपेश बघेल ने कहा कि वे राज्यसभा नहीं, बल्कि विधानसभा में रहकर जनता के मुद्दों को उठाना चाहते हैं। उनके इस फैसले से कांग्रेस खेमे में संभावित दावेदारों को लेकर मंथन तेज हो गया है और समीकरण नए सिरे से गढ़े जा रहे हैं।
भाजपा का ‘7 का पैनल’: जाति, क्षेत्र और संगठन का संतुलन
राज्यसभा की एक सीट भाजपा के खाते में जाना लगभग तय माना जा रहा है। इसी के मद्देनज़र पार्टी ने पैनल में जातीय प्रतिनिधित्व और संगठनात्मक अनुभव का संतुलन रखा है—
🔹 अनुसूचित जाति (SC):
- नवीन मार्कंडेय
- डॉ. कृष्णमूर्ति बांधी
- किरण बघेल
🔹 सामान्य वर्ग:
- गौरीशंकर अग्रवाल (पूर्व विधानसभा अध्यक्ष)
- प्रबल प्रताप सिंह जूदेव
- सरोज पांडे
🔹 अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC):
- नारायण सिंह चंदेल (पूर्व नेता प्रतिपक्ष)
सूत्रों के अनुसार, पार्टी हाईकमान सरगुजा या बस्तर जैसे आदिवासी अंचलों के प्रतिनिधित्व, जमीनी पकड़ और सांगठनिक अनुभव को अंतिम चयन में खास तवज्जो दे सकता है।
कांग्रेस में नामों पर मंथन तेज
कांग्रेस कोटे की दो राज्यसभा सीटें—के.टी.एस. तुलसी और फूलो देवी नेताम—9 अप्रैल को रिक्त हो रही हैं। भूपेश बघेल के नाम वापस लेने के बाद अब पार्टी के भीतर , , दीपक बैज और मोहन मरकाम के नाम सबसे आगे माने जा रहे हैं।
विधानसभा में संख्या बल को देखते हुए कांग्रेस एक सीट बचाने की रणनीति पर केंद्रित है, जबकि दूसरी सीट को लेकर मुकाबला कड़ा माना जा रहा है।
अंतिम फैसला हाईकमान के हाथ
अब सबकी नजरें भाजपा और कांग्रेस—दोनों के केंद्रीय नेतृत्व पर टिकी हैं। नामों की अंतिम घोषणा के साथ ही यह तय होगा कि राज्यसभा के जरिए छत्तीसगढ़ की सियासत में किसे नई भूमिका और किसे नई चुनौती मिलने वाली है।











