ads

Adsterra

सरकार की आंख में धूल झोंक रहे जिम्मेदार, लीपापोती कर रोजगार सहायकों को बनाया जा रहा मोहरा जनपद से जिला तक बड़ों का मनोबल कायम


(CG ई खबर | प्रमुख संपादक : ओम प्रकाश पटेल)

छत्तीसगढ़ / कोरबा : केंद्र सरकार की अति महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) को धरातल पर उतारने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार और कोरबा जिला प्रशासन लगातार प्रयासरत हैं। जिला एवं जनपद पंचायत स्तर पर निगरानी व्यवस्था भी मौजूद है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। पंचायत स्तर से लेकर जिला कार्यालय तक बैठे जिम्मेदारों के संरक्षण में न केवल सरकार की आंखों में धूल झोंकी जा रही है, बल्कि एक आवास दिखाकर दूसरे आवास की राशि निकाली जा रही है।

स्थिति यह है कि बिना निर्माण कराए ही फर्जी जियो टैग के जरिए आवास और मनरेगा की राशि का आहरण किया जा रहा है। आवास योजना के साथ-साथ मनरेगा में भी खुलेआम लूट की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ लीपापोती की जा रही है। वर्षों से जमे आवास एवं मनरेगा शाखा के कर्मचारियों की बदौलत सरकारी धन भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रहा है और कागजों में आवासों के आंकड़े लगातार बढ़ते जा रहे हैं।
सख्त कार्रवाई, आर्थिक अनियमितताओं पर FIR और वसूली की प्रक्रिया न होने से दोषियों के हौसले बुलंद होते जा रहे हैं।

फर्जी जियो टैग से भुगतान का ताजा मामला

इसी कड़ी में विकासखंड करतला अंतर्गत ग्राम पंचायत बेहरचुंवा से एक और गंभीर मामला सामने आया है।
यहां रमिला बाई पति विजय कुमार के नाम पर सत्र 2024–2025 में प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत किया गया। आवास की प्रथम किश्त की राशि 01 नवंबर 2025 को 40,000 रुपये हितग्राही के खाते में जमा कराई गई। इसके बाद 24 जनवरी 2026 को जो फोटो जियो टैग किया गया, वह किसी अन्य हितग्राही के आवास का बताया जा रहा है।

👉 हकीकत यह है कि रमिला बाई पति विजय कुमार द्वारा अब तक किसी भी प्रकार का आवास निर्माण नहीं कराया गया है। इसके बावजूद फर्जी जियो टैग के आधार पर भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
जानकारी के अनुसार, रमिला बाई द्वारा अपनी माता श्रीमती प्यासो बाई पति हेतराम के निर्माणाधीन प्रधानमंत्री आवास को ही अपना आवास बताया जा रहा है, जबकि जियो टैग में दोनों हितग्राहियों के मकान अलग-अलग दर्शित हो रहे हैं। सामने आई तस्वीरें भी श्रीमती प्यासो बाई के निर्माणाधीन मकान की बताई जा रही हैं।
सूत्रों के अनुसार, रमिला बाई पति विजय कुमार का मकान ग्राम पंचायत रामपुर में बनाया जा रहा है, जो इस पूरे मामले को और संदिग्ध बनाता है।

👉 गंभीर सवाल यह है कि जब आवास मित्र, रोजगार सहायक, पंचायत सचिव के साथ-साथ जनपद स्तर के एक अधिकारी की ड्यूटी प्रधानमंत्री आवास योजना में निर्माण मॉनिटरिंग के लिए लगी हुई है, तब इस तरह का फर्जीवाड़ा कैसे हो रहा है?
इसके बावजूद सिर्फ फर्जी जियो टैग के सहारे सामग्री भुगतान और मजदूरी भुगतान कराने की तैयारी की जा रही है।

👉 इससे साफ जाहिर होता है कि इस पूरे फर्जीवाड़े में आवास मित्र, रोजगार सहायक, सचिव और जनपद स्तर के अधिकारी की मिलीभगत है। भुगतान इन्हीं के माध्यम से आगे बढ़ता है, यही कारण है कि शिकायतें सामने आने के बावजूद न तो जांच होती है और न ही कोई ठोस कार्रवाई।
ग्राम पंचायत बेहरचुंवा में इससे पहले भी प्रधानमंत्री आवास योजना में घोटाले उजागर हो चुके हैं, लेकिन तब भी जिम्मेदारों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।

यदि इस मामले की निष्पक्ष जांच किसी स्वतंत्र टीम से कराई जाए, तो जिले में फर्जी जियो टैग और आवास घोटाले के कई और मामले सामने आ सकते हैं।
अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर मामले पर कब तक आंख मूंदे रहता है या फिर वास्तव में दोषियों पर सख्त कार्रवाई करता है।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.

Top Post Ad

Below Post Ad






Ads





ads