छत्तीसगढ़ आदिवासी विकास परिषद ने सौंपा ज्ञापन, लगाए गंभीर आरोप
(CG ई खबर | दर्री ब्लॉक रिपोर्टर: सरस्वती मरकाम)
छत्तीसगढ़ / कोरबा जिले के करतला एवं कोरबा कोल ब्लॉक के आवंटन के विरोध में आज छत्तीसगढ़ आदिवासी विकास परिषद के पदाधिकारियों ने जिला कलेक्टर को देश की राष्ट्रपति एवं प्रधानमंत्री के नाम तीन सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा। परिषद ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आदिवासी बहुल क्षेत्र में कोयला खनन की अनुमति यहां के लोगों के अस्तित्व, आजीविका और संस्कृति पर सीधा खतरा है।
ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि इस क्षेत्र के अधिकांश परिवार खेती, लघु वनोपज और पारंपरिक संसाधनों पर निर्भर हैं। यदि खनन शुरू होता है तो सबसे पहले जंगलों की कटाई, जल स्रोतों का क्षरण और जमीन अधिग्रहण तेज होगा। इसका सीधा असर ग्रामीणों पर पड़ेगा, जिससे विस्थापन, बेरोजगारी और सामाजिक असुरक्षा जैसी गंभीर समस्याएं खड़ी होंगी।
परिषद ने यह भी आशंका जताई कि कोयला खनन से प्रदूषण बढ़ेगा, जिसका दुष्प्रभाव बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर पड़ेगा। धूल प्रदूषण, जल संकट, भारी वाहनों की आवाजाही से सड़क हादसों में वृद्धि जैसी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं।
पदाधिकारियों ने कहा कि क्षेत्र अनुसूचित क्षेत्र में आता है, जहां पेसा कानून के तहत ग्राम सभा की पूर्व एवं लिखित सहमति अनिवार्य है। आरोप लगाया गया कि स्थानीय लोगों को विश्वास में लिए बिना ही निर्णय लिए जा रहे हैं, जो कानून की भावना के विरुद्ध है।
परिषद की प्रमुख मांगें
- करतला–कोरबा कोल ब्लॉक आवंटन प्रक्रिया तत्काल रोकी जाए।
- सभी संबंधित ग्राम सभाओं से लिखित सहमति अनिवार्य रूप से ली जाए।
- पर्यावरणीय एवं सामाजिक प्रभावों का स्वतंत्र अध्ययन कर उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
परिषद ने चेतावनी दी कि यदि आदिवासियों के जल–जंगल–जमीन से जुड़े अधिकारों की अनदेखी की गई, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।











