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कोरबा–कटघोरा प्रदाय केंद्र में CMR चावल घोटाला: दूसरे जिले की आईडी–पासवर्ड/ओटीपी से लॉट स्वीकृति, घटिया चावल पर बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर


(CG ई खबर | प्रमुख संपादक : ओमप्रकाश पटेल)


कोरबा–कटघोरा प्रदाय केंद्र में अफरा-तफरी: दूसरे जिले के कर्मी की आईडी–पासवर्ड/ओटीपी से स्वीकारा गया चावल का लॉट 


जिम्मेदार अधिकारियों पर फर्जीवाड़े का बड़ा आरोप, मिलरों की भूमिका सवालों में

रायपुर/कोरबा। के कोरबा स्थित गोदामों में मिलर्स से प्राप्त कस्टम मिल्ड राइस (CMR) के हजारों क्विंटल चावल घटिया गुणवत्ता के पाए जाने का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। कस्टम मिलिंग के तहत चावल स्वीकार करने की प्रक्रिया में भारी गड़बड़ी और भ्रष्टाचार सामने आया है। नान मुख्यालय की जांच टीम ने गुणवत्ता निरीक्षण के बाद अपनी रिपोर्ट में इन अनियमितताओं की पुष्टि की है।
सूत्रों के अनुसार, कार्रवाई के बजाय जिम्मेदार आला अफसरों को बचाने की कवायद तेज है। जिला प्रबंधक समेत कई अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

CMR क्या है?

कस्टम मिल्ड राइस (CMR) वह चावल है, जिसे राइस मिलर्स सरकारी एमएसपी पर उपार्जन केंद्रों से खरीदे गए धान की कुटाई कर तैयार करते हैं। तय प्रतिशत के अनुसार यह चावल (FCI) या संबंधित शासकीय एजेंसियों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के लिए लौटाया जाता है, जिसे उचित मूल्य दुकानों के माध्यम से राशन कार्डधारियों को वितरित किया जाता है।

जांच में कैसे खुला खेल?

नान मुख्यालय की टीम ने कोरबा और कटघोरा के प्रदाय केंद्र गोदामों का निरीक्षण किया। रिपोर्ट में चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि दूसरे जिले के कनिष्ठ तकनीकी सहायक की आईडी, पासवर्ड और ओटीपी का उपयोग कर चावल के लॉट स्वीकार किए गए, जबकि स्वीकृति के समय संबंधित स्वीकृतकर्ता कोरबा में भौतिक रूप से मौजूद ही नहीं थे
इसी तरह, विभिन्न तकनीकी सहायकों की आईडी का दुरुपयोग कर फर्जी स्वीकृतियां दर्ज की गईं। रिपोर्ट में पूर्व प्लेसमेंट कर्मचारी प्रकाश बरेठ का नाम भी आया है—जिस पर अन्य जिलों में पदस्थ तकनीकी सहायकों की आईडी से सर्वर लॉग-इन और ओटीपी साझा कर लॉट स्वीकार कराने का आरोप है।
गौरतलब है कि नान मुख्यालय के स्पष्ट निर्देशों के अनुसार आईडी/पासवर्ड/ओटीपी साझा करना प्रतिबंधित है।

नोटिस और प्राथमिक निष्कर्ष

मामले में आठ तकनीकी सहायकों को नोटिस जारी किए गए हैं। अलग-अलग लॉटों के विभिन्न स्टैक्स में रखे चावल प्रथम दृष्टया ही घटिया पाए गए हैं।

👉🏻 आईडी कोरबा कैसे पहुंची?

बेमेतरा जिले के कर्मचारी महेश्वर लाल सोनवानी की आईडी कोरबा कैसे स्थानांतरित हुई, इस पर भी सवाल उठ रहे हैं। जबकि संबंधित कर्मचारी को बेमेतरा में ही रोके रखने की जानकारी है। इससे नान मुख्यालय के कुछ अफसरों की भूमिका भी संदेह के घेरे में आ गई है। सूत्रों का दावा है कि यह पूरी अफरा-तफरी सुनियोजित तरीके से अंजाम दी गई।

👉🏻 ये सवाल भी उठ रहे हैं

  • जब तकनीकी कर्मी भौतिक रूप से मौजूद नहीं थे, तब उनकी आईडी से कागजी कार्रवाई पर जिला प्रबंधक व अन्य अफसरों ने आंख क्यों मूंदी?
  • यदि अन्य जिलों में छोटे कर्मचारियों ने आदेश पर अवैधानिक काम किया, तो जिला प्रबंधकों पर कार्रवाई क्यों नहीं?
  • क्या विभिन्न जिलों के प्रबंधकों की सांठगांठ से कोरबा में घटिया चावल की धड़ल्ले से खरीदी हुई?

🫵🏻 “गुणवत्ता से समझौता नहीं” – अध्यक्ष

, अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ राज्य नागरिक आपूर्ति निगम ने कहा कि चावल की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। प्रारंभिक जांच के बाद गुणवत्ता निरीक्षक समेत अन्य पर निलंबन व कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। विस्तृत जांच जारी है; रिपोर्ट के बाद दोषी आला अधिकारियों पर भी कार्रवाई होगी। किसी को बख्शा नहीं जाएगा।

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