SECL की लापरवाही से धुआं-धुआं हुआ जनजीवन, कोयले की धूल ने छीनी सांसें

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**SECL की लापरवाही से धुआं-धुआं हुआ जनजीवन

कोयले की धूल फांकने को मजबूर कर्मचारी और ग्रामीण, प्रबंधन ने आंखों पर बांधी पट्टी**

गेवरा//दीपका//कोरबा:- (SECL) प्रबंधन की घोर लापरवाही अब क्षेत्र के लिए धीमा जहर बनती जा रही है। कोयला खदानों और जर्जर सड़कों से उड़ने वाली काली धूल ने न केवल कॉलोनियों और गांवों की आबोहवा बिगाड़ दी है, बल्कि हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि क्षेत्रीय महाप्रबंधक (GM) कार्यालय भी इस धूल के गुबार से अछूता नहीं रह गया है। खदानों से कोयला लेकर निकलने वाले भारी वाहनों से उड़ती धूल ने पूरे इलाके को प्रदूषण की चादर में ढक दिया है।


दफ्तरों के भीतर तक पहुंची कालिख

हैरानी की बात यह है कि जिस प्रबंधन और अधिकारियों पर प्रदूषण रोकने की जिम्मेदारी है, वे खुद धूल से भरे कमरों में बैठकर फाइलों पर हस्ताक्षर कर रहे हैं। हवा में घुल चुकी कोयले की महीन डस्ट अब SECL के दफ्तरों के भीतर तक प्रवेश कर चुकी है। कर्मचारी हों या ग्रामीण—सभी रोज़ाना इस काली डस्ट को अपने फेफड़ों में उतारने को मजबूर हैं, लेकिन प्रबंधन अब भी गहरी नींद में सोया हुआ है। 



पर्यावरण नियमों की खुली अवहेलना

01. पर्यावरण विभाग – कागजों पर क्लीन, धरातल पर धूल
जनसुनवाई के दौरान बड़े-बड़े वादे और पर्यावरण संरक्षण का ढिंढोरा पीटने वाला विभाग अब सवालों के घेरे में है।

02. दिखावे की जनसुनवाई
ग्रामीणों का आरोप है कि जनसुनवाई में प्रदूषण नियंत्रण के पुख्ता इंतजामों का झांसा देकर कोयला उत्पादन का वार्षिक लक्ष्य तो बढ़ा लिया जाता है, लेकिन धरातल पर पानी के छिड़काव जैसे बुनियादी उपाय तक नहीं किए जाते।

03. नियमों की धज्जियां
पर्यावरण विभाग की चुप्पी इस ओर इशारा करती है कि जनता के स्वास्थ्य से ज्यादा खदान के टार्गेट की चिंता की जा रही है। नियमों की सरेआम अनदेखी हो रही है।


आंखों पर बंधी है काली पट्टी

प्रभावित ग्रामीणों का कहना है कि सड़क किनारे रहने वाले परिवारों का जीना मुहाल हो गया है। घरों के भीतर रखी खाने-पीने की चीजों से लेकर बिस्तर तक पर कोयले की परत जम रही है। इतनी गंभीर स्थिति के बावजूद अधिकारी एसी कमरों और बंद गाड़ियों में बैठकर जनता की तकलीफों के प्रति आंखों पर काली पट्टी बांधे हुए हैं।


चेतावनी

क्षेत्र के प्रभावित ग्रामीणों और जागरूक नागरिकों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही

  • सड़कों पर नियमित पानी का छिड़काव,
  • कोल वाहनों को तिरपाल से ढंकना,
  • और डस्ट कंट्रोल के ठोस इंतजाम
    नहीं किए गए, तो उग्र आंदोलन किया जाएगा। इसकी समस्त जिम्मेदारी SECL प्रबंधन और प्रशासन की होगी।

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