कोरबा। ऊर्जाधानी भू-विस्थापित किसान कल्याण समिति (UBKKS) ने कोयला खनन से प्रभावित किसानों की आजीविका को लेकर आवाज बुलंद की है। समिति ने एसईसीएल गेवरा क्षेत्र के मुख्य महाप्रबंधक को ज्ञापन सौंपकर भू-विस्थापित परिवारों को टेंडरों में आरक्षण देने और टेंडर की मूल्य सीमा बढ़ाने की मांग की है।
समिति का कहना है कि कोयला खनन परियोजनाओं के कारण हजारों किसान अपनी पैतृक भूमि खो चुके हैं, जिससे उनके सामने रोजगार और आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। ऐसे में परियोजना प्रभावितों को वैकल्पिक रोजगार उपलब्ध कराना प्रबंधन की नैतिक जिम्मेदारी है।
प्रमुख मांगें
1. टेंडर मूल्य सीमा में वृद्धि:
वर्तमान में विस्थापितों और उनकी सहकारी समितियों के लिए सुरक्षित टेंडर की अनुमानित राशि मात्र 5 लाख रुपये है। समिति ने इसे बढ़ाकर न्यूनतम 20 लाख रुपये करने तथा वार्षिक टेंडर सीमा को 5 करोड़ रुपये तक करने की मांग की है।
2. 20% आरक्षण की बहाली:
समिति ने वर्ष 2018 के पत्र (SECL/BSP/CAD/642/FD) का हवाला देते हुए कोल ट्रांसपोर्टेशन सहित अन्य कार्यों की निविदाओं में स्थानीय भू-विस्थापित सहकारी समितियों के लिए 20% आरक्षण फिर से लागू करने की मांग की है।
3. फर्जीवाड़े और भ्रष्टाचार पर रोक:
समिति का आरोप है कि कुछ बाहरी लोग भू-विस्थापितों के प्रमाणपत्रों का दुरुपयोग कर टेंडरों में हिस्सा ले रहे हैं। ऐसे लोगों को ब्लैकलिस्ट करने और केवल वास्तविक परियोजना प्रभावितों को ही प्राथमिकता देने की मांग की गई है।
4. अत्यधिक कम रेट की जांच:
कुछ टेंडर अनुमानित लागत से 60% से 73% तक कम दरों पर डाले जाने पर समिति ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि इतनी कम राशि में कार्य की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है, इसलिए इसकी उच्च स्तरीय जांच कराई जाए।
5. CSR के तहत रोजगार अवसर:
समिति ने मांग की है कि कंपनी के CSR फंड के माध्यम से भू-विस्थापितों को विभागीय कॉलोनियों और कार्यालयों में स्थायी आजीविका और स्वरोजगार के अवसर दिए जाएं।
समिति के अध्यक्ष सपुरन कुलदीप ने बताया कि विस्थापितों के रोजगार को लेकर संगठन लंबे समय से संघर्ष कर रहा है और कई महत्वपूर्ण फैसले भी कराए गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व में लिए गए निर्णयों को धीरे-धीरे वापस लिया जा रहा है या बड़े टेंडर जारी कर छोटे विस्थापितों को बाहर किया जा रहा है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इन मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो भू-विस्थापित परिवार अपने अधिकारों के लिए आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
समिति ने इस पत्र की प्रतिलिपि कोयला मंत्री, स्थानीय सांसद-विधायकों और एसईसीएल के शीर्ष अधिकारियों को भी कार्रवाई के लिए भेजी है।

