(CG ई खबर | प्रमुख संपादक : ओम प्रकाश पटेल)
मिली जानकारी के अनुसार, पीड़ित दीपक सिंह कंवर (पिता स्व. महावीर सिंह कंवर) और मुकेश कुमार (पिता तेरसराम चैतन्य) दोनों ग्राम हरदीबाजार, तहसील व थाना हरदीबाजार, जिला कोरबा के निवासी हैं और कंवर जनजाति से संबंध रखते हैं।
पीड़ितों ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि ग्राम हरदीबाजार एसईसीएल दीपका परियोजना से अधिग्रहित क्षेत्र है, जहां स्थानीय बेरोजगारों को वैकल्पिक रोजगार देने का प्रावधान है। इसी उम्मीद में मुकेश कुमार नौकरी की तलाश में कंपनी के कार्यालय पहुंचे थे।
आरोप है कि कंपनी के चपरासी रामप्रताप पटेल ने उन्हें ड्राइवर की नौकरी दिलाने का झांसा देकर 70 हजार रुपये ले लिए। करीब एक माह बीत जाने के बाद भी नौकरी नहीं मिली। जब मुकेश कुमार का ड्राइविंग ट्रायल लिया गया तो आरोप है कि कर्मचारी रवि सिंह के कहने पर उन्हें जानबूझकर फेल कर दिया गया।
ऑफिस में घुसने पर गाली-गलौज और धक्का-मुक्की
पीड़ितों के अनुसार, 25 फरवरी 2026 को वे दोनों कंपनी कार्यालय पहुंचे और नौकरी तथा पैसे को लेकर जानकारी मांगी। इस दौरान वहां मौजूद मैनेजर विकास दुबे और चपरासी रामप्रताप पटेल ने कथित रूप से जातिसूचक गालियां देते हुए उन्हें ऑफिस में घुसने पर अपमानित किया। आरोप है कि दोनों को डंडे से मारकर बाहर निकालने की बात कही गई और धक्का-मुक्की करते हुए कार्यालय से बाहर निकाल दिया गया।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि दीपक सिंह कंवर पहले कंपनी में ड्राइवर के रूप में कार्यरत थे, लेकिन घटना के बाद उन्हें बिना कारण नौकरी से निकाल दिया गया और अब दोबारा काम देने से भी मना किया जा रहा है।
कंपनी पर पहले भी उठते रहे हैं सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि एसईसीएल के अधिग्रहित गांवों के युवाओं को रोजगार देने के नियमों की अनदेखी कर बाहरी लोगों को प्राथमिकता दी जा रही है। आरोप है कि ठेका कंपनियों के कुछ अधिकारी स्थानीय बेरोजगारों से पैसे लेकर नौकरी का झांसा देते हैं, जिससे क्षेत्र में लगातार आक्रोश बढ़ रहा है।
बताया जा रहा है कि उक्त कंपनी और उसके मैनेजर के खिलाफ पहले भी कई शिकायतें सामने आ चुकी हैं और हाल ही में स्थानीय लोगों द्वारा उग्र आंदोलन भी किया गया था।
इन धाराओं में दर्ज हुआ मामला
हरदीबाजार पुलिस ने आरोपी विकास दुबे, रामप्रताप पटेल और रवि सिंह के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 296, 115(2), 118(2), 3(5) तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989 (संशोधित 2015) की धारा 3(1) के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
अब सवाल यह उठ रहा है कि एसईसीएल क्षेत्र के अधिग्रहित गांवों के बेरोजगारों के साथ हो रहे कथित शोषण और ठेका कंपनियों की मनमानी पर आखिर कब तक लगाम लगेगी?
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