एफआईआर कराने पर परिवार का सामाजिक बहिष्कार, पंचायत के फैसले से डरा-सहमा परिवार; प्रशासन से लगाई न्याय की गुहार
छत्तीसगढ़ / बलरामपुर (CG ई खबर)
बलरामपुर जिले के वाड्रफनगर विकासखंड से इंसानियत को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। यहां दुष्कर्म की शिकायत दर्ज कराने पर पीड़िता और उसके पूरे परिवार को गांव की पंचायत ने सामाजिक रूप से बहिष्कृत कर दिया। इतना ही नहीं, पंचायत ने पीड़ित परिवार को बेहद अपमानजनक और अमानवीय दंड सुनाया, जिससे पूरे इलाके में आक्रोश का माहौल बन गया है।
📌 क्या है पूरा मामला
मामला बसंतपुर थाना क्षेत्र के एक गांव का बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार गांव की एक महिला के साथ दुष्कर्म की घटना हुई थी। घटना के बाद जब महिला गर्भवती हुई तो उसने आरोपियों के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराने का निर्णय लिया।
पीड़िता जब अपने परिवार के साथ थाने पहुंचकर एफआईआर दर्ज कराने गई, उसी दौरान गांव में कुछ प्रभावशाली लोगों ने पंचायत बुला ली और मामले पर चर्चा की गई।
⚖️ पंचायत ने सुनाया सामाजिक दंड
पीड़िता के परिजनों का आरोप है कि पंचायत की बैठक में महिला और उसके परिवार को ही दोषी ठहराया गया। पंचायत ने पूरे परिवार का सामाजिक बहिष्कार करने का फैसला सुनाया।
इतना ही नहीं, पंचायत में यह भी कहा गया कि यदि परिवार को समाज में वापस रहना है तो उन्हें पूरे गांव के लोगों के पैर धोकर उसी पानी से स्नान करना होगा। साथ ही दंड के रूप में गांव वालों को बकरा और शराब का भोज भी कराना होगा।
😟 डरा-सहमा परिवार, प्रशासन से लगाई गुहार
पंचायत के इस फैसले के बाद पीड़ित परिवार को गांव के धार्मिक कार्यक्रमों, सामाजिक आयोजनों और सामुदायिक गतिविधियों से दूर रहने के लिए कहा गया है। इस घटना से परिवार बेहद डरा और सहमा हुआ है।
पीड़िता के परिजनों ने प्रशासन से सुरक्षा और न्याय की मांग की है। उनका कहना है कि पंचायत के दबाव और सामाजिक बहिष्कार के कारण वे मानसिक रूप से परेशान हैं और उन्हें किसी अनहोनी का डर भी सता रहा है।
🏛️ जांच और कार्रवाई की मांग
मामला सामने आने के बाद स्थानीय प्रशासन से इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करने की मांग उठने लगी है। सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों का कहना है कि पीड़िता को न्याय दिलाना और ऐसे अमानवीय फरमान देने वालों पर सख्त कार्रवाई करना जरूरी है।
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