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नई दिल्ली। लोकसभा में नियम 193 के तहत नक्सलवाद पर हुई चर्चा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री ने विपक्ष, खासकर कांग्रेस और नेता प्रतिपक्ष पर तीखा हमला बोला। करीब डेढ़ घंटे के अपने भाषण में उन्होंने नक्सलवाद के इतिहास, इसके विस्तार और केंद्र सरकार की रणनीति पर विस्तार से बात रखते हुए कई बड़े दावे किए।
🔴 नक्सलवाद खत्म करने का दावा
गृह मंत्री ने कहा कि सरकार ने 31 मार्च 2026 तक देश को नक्सल-मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा था और अब स्थिति ऐसी है कि “भारत को नक्सल मुक्त कहा जा सकता है।” उन्होंने बताया कि पिछले 11 वर्षों में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बड़े स्तर पर विकास और सुरक्षा ढांचे को मजबूत किया गया।
📊 आंकड़ों के जरिए सरकार का दावा
- पिछले 3 वर्षों में 706 नक्सली मारे गए
- 2218 गिरफ्तार और 4839 ने सरेंडर किया
- 2014 में 126 नक्सल प्रभावित जिले अब घटकर सिर्फ 2 रह गए
- 596 नए पुलिस स्टेशन बनाए गए
- नक्सल घटनाओं वाले पुलिस स्टेशन 350 से घटकर 7 रह गए
🏗️ बस्तर में विकास का मॉडल
शाह ने कहा कि छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में नक्सलवाद लगभग समाप्त हो चुका है। यहां हर गांव में स्कूल, राशन दुकान, स्वास्थ्य केंद्र (PHC/CHC) और आधार-राशन कार्ड जैसी सुविधाएं पहुंचाई गई हैं। लोगों को मुफ्त अनाज भी दिया जा रहा है।
⚔️ कांग्रेस पर सीधा हमला
गृह मंत्री ने कहा कि 70 में से 60 साल कांग्रेस की सरकार रही, लेकिन विकास नहीं हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस शासन में माओवादी विचारधारा फैली और नक्सलवाद ने जड़ें जमाईं। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री का नाम लेते हुए कहा कि “प्रूफ चाहिए तो दे सकता हूं।”
🧠 विचारधारा पर सवाल
शाह ने कहा कि नक्सलवाद का मकसद विकास नहीं, बल्कि विदेशी विचारधारा से प्रेरित है। उन्होंने यह भी कहा कि नक्सलियों की तुलना और जैसे स्वतंत्रता सेनानियों से करना “हिमाकत” है।
🔫 सख्त चेतावनी
गृह मंत्री ने साफ कहा कि नक्सलियों को हथियार छोड़कर मुख्यधारा में आना होगा, वरना “सरकार गोली का जवाब गोली से देगी।” उन्होंने यह भी कहा कि यह “डरने वाली नहीं, न्याय करने वाली सरकार” है।
🪖 शहीद जवानों को श्रद्धांजलि
शाह ने बताया कि नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में अब तक 5000 से ज्यादा जवान शहीद हुए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की राजनीतिक इच्छाशक्ति और रणनीति से ही यह लड़ाई निर्णायक मोड़ पर पहुंची है।
👉 निष्कर्ष:
लोकसभा में नक्सलवाद पर हुई इस चर्चा में गृह मंत्री ने जहां एक ओर सरकार की उपलब्धियां गिनाईं, वहीं कांग्रेस और विपक्ष पर गंभीर आरोप भी लगाए। नक्सलवाद के खात्मे को लेकर सरकार का आत्मविश्वास साफ नजर आया, लेकिन इस मुद्दे पर सियासी टकराव भी तेज हो गया है।

