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छत्तीसगढ़ में नशा मुक्ति अभियान या विरोधाभास? एक ओर जागरूकता, दूसरी ओर खुले नशे के ठेके


(CG ई खबर | प्रमुख संपादक : ओमप्रकाश पटेल )

रायपुर/छत्तीसगढ़। “नशा मुक्त समाज की ओर आपका एक कदम...” जैसे संदेशों के साथ प्रदेशभर में नशा मुक्ति अभियान चलाया जा रहा है। आम नागरिकों से अपील की जा रही है कि वे नशे के खिलाफ आगे आएं और समाज को जागरूक बनाएं। लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग नजर आ रही है।

एक ओर सरकार और प्रशासन नशा मुक्ति का संदेश दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर छत्तीसगढ़ में शराब की सरकारी दुकानें लगातार संचालित हो रही हैं। राज्य सरकार खुद शराब बिक्री से बड़ा राजस्व कमा रही है। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या नशा मुक्ति अभियान सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गया है?

प्रदेश के कई हिस्सों में गुटखा, तंबाकू और सिगरेट खुलेआम बिक रहे हैं। युवाओं से लेकर स्कूली बच्चों तक नशे की लत तेजी से बढ़ रही है, जो समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय बन चुकी है।

विशेषज्ञों की राय
सामाजिक कार्यकर्ताओं और जानकारों का कहना है कि यदि सच में छत्तीसगढ़ को नशा मुक्त बनाना है, तो केवल जागरूकता अभियान से काम नहीं चलेगा। इसके लिए कड़े और ठोस फैसले लेने होंगे—

  • शराब की दुकानों को बंद करना होगा
  • गुटखा, तंबाकू और सिगरेट पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना होगा
  • नशीले पदार्थों की उपलब्धता पूरी तरह खत्म करनी होगी

दोहरी नीति पर उठ रहे सवाल
लोगों का कहना है कि एक तरफ सरकार नशा मुक्ति की बात करती है और दूसरी तरफ खुद ही शराब की दुकानें संचालित करती है। यह दोहरी नीति अभियान की गंभीरता पर सवाल खड़े करती है।

निष्कर्ष:
छत्तीसगढ़ को नशा मुक्त बनाने के लिए केवल नारों और अभियानों से आगे बढ़कर ठोस नीति और सख्त कार्रवाई की जरूरत है। जब तक नशे के स्रोतों पर पूरी तरह रोक नहीं लगेगी, तब तक यह अभियान अधूरा ही रहेगा।

👉 जागरूक बनें, लेकिन साथ ही नशा मुक्त छत्तीसगढ़ के लिए सख्त नीति की मांग भी करें।

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