नई दिल्ली: देश की राजधानी से एक बड़ी राजनीतिक खबर सामने आई है। आम आदमी पार्टी (आप) को बड़ा झटका देते हुए उसके सात सांसदों ने शुक्रवार को पार्टी से इस्तीफा दे दिया। इनमें प्रमुख नाम , , , और शामिल हैं। इनके अलावा राजेंद्र गुप्ता और विक्रम साहनी ने भी पार्टी छोड़ दी है।
बताया जा रहा है कि इन सभी नेताओं ने से इस्तीफा देकर में विलय कर लिया है। इस घटनाक्रम के बाद संसद में ‘आप’ का संख्या बल काफी घट गया है, जिससे पार्टी की राजनीतिक स्थिति पर असर पड़ना तय माना जा रहा है।
सिद्धांतों से भटकने का आरोप
इस्तीफे के बाद ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि पार्टी अपने मूल सिद्धांतों और मूल्यों से भटक गई है। उन्होंने संकेत दिया कि यह फैसला केवल राजनीतिक नहीं बल्कि वैचारिक मतभेदों के कारण लिया गया है।
पहले से संकट में थी पार्टी
गौरतलब है कि बीते दो वर्षों में और जैसे शीर्ष नेताओं की गिरफ्तारी (आबकारी नीति मामले में) के बाद पार्टी पहले ही दबाव में थी। उस दौरान दूसरी पंक्ति के नेताओं ने संगठन और सरकार दोनों को संभालने की कोशिश की थी।
चुनावी तैयारियों पर असर
यह इस्तीफा ऐसे समय आया है जब पार्टी , और में आगामी चुनावों की तैयारी कर रही है। ऐसे में वरिष्ठ नेताओं का एक साथ जाना पार्टी की रणनीति और संगठनात्मक मजबूती पर बड़ा असर डाल सकता है।
राज्यसभा में घटा प्रभाव
इन इस्तीफों के बाद राज्यसभा में ‘आप’ के सदस्यों की संख्या 10 से घटकर महज 3 रह गई है। इससे सदन में पार्टी की आवाज और प्रभाव दोनों कमजोर पड़ने की संभावना है।
पार्टी का पक्ष
हालांकि पार्टी नेताओं का कहना है कि संगठन की जमीनी पकड़ और शासन के सिद्धांत अभी भी मजबूत हैं। उनका दावा है कि दिल्ली और पंजाब में पार्टी की स्थिति बरकरार है और अन्य राज्यों में भी वह अपनी पकड़ मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है।
कुल मिलाकर, सात सांसदों का एक साथ पार्टी छोड़ना ‘आप’ के लिए बड़ा राजनीतिक और संगठनात्मक झटका माना जा रहा है, जिसका असर आने वाले चुनावों में देखने को मिल सकता है।

