(CG ई खबर | प्रमुख संपादक | ओम प्रकाश पटेल)
गेवरा/कोरबा: (SECL) गेवरा परियोजना से प्रभावित ग्राम रलिया, मनगांव, लक्ष्मण नगर और नरईबोध के ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। अपनी मांगों को लेकर ग्रामीणों ने प्रशासन और SECL प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
सोमवार को ग्रामीणों ने कलेक्टर, विधायक और SECL के महाप्रबंधक को ज्ञापन सौंपते हुए चेतावनी दी है कि यदि 7 दिनों के भीतर उनकी मांगें पूरी नहीं की गईं, तो 28 अप्रैल 2026 से गेवरा कार्यालय के सामने उग्र और अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन किया जाएगा।
प्रमुख मांगें और समस्याएं
1. रुका हुआ मुआवजा:
ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम रलिया के बहादुर केंवट का मकान तोड़े जाने के एक माह बाद भी मुआवजा राशि खाते में जमा नहीं हुई है। वहीं मनगांव और लक्ष्मण नगर के विस्थापितों की दोबारा अधिग्रहित भूमि का मुआवजा भी लंबित है।
2. रोजगार की अनदेखी:
प्रभावित परिवारों को न तो स्थायी रोजगार दिया जा रहा है और न ही वैकल्पिक रोजगार की व्यवस्था की गई है। कई भूमि संबंधी प्रकरण वर्षों से लंबित पड़े हैं, जिससे ग्रामीणों में नाराजगी है।
3. बाहरी हस्तक्षेप और असुरक्षा:
ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि शांतिपूर्ण धरने के दौरान कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा डराया-धमकाया जा रहा है। साथ ही नरईबोध के पार्षद पति राकेश पटेल पर आरोप है कि वे प्रभावित युवाओं की PNC कंपनी में जॉइनिंग को अवैध रूप से रुकवा रहे हैं।
प्रशासन और SECL को अल्टीमेटम
ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि उन्होंने अपनी जमीन SECL को दी है, किसी स्थानीय प्रतिनिधि को नहीं। इसलिए प्रबंधन और प्रशासन सीधे विस्थापितों से संवाद करे।
ज्ञापन में मांग की गई है कि:
- 7 दिनों के भीतर लंबित मुआवजा राशि का भुगतान किया जाए
- प्रभावितों को रोजगार उपलब्ध कराया जाए
- धरना स्थल और मार्गों पर पुलिस सुरक्षा सुनिश्चित की जाए
महिला प्रभावित का बयान
प्रभावित महिला गोमती केवट ने कहा कि वे अपनी जायज मांगों के लिए वर्षों से संघर्ष कर रहे हैं। यदि निर्धारित समय में ठोस कार्रवाई नहीं होती, तो 28 अप्रैल से शुरू होने वाले अनिश्चितकालीन आंदोलन की पूरी जिम्मेदारी SECL प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन की होगी।
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