पवन सिंह ने दी चेतावनी — “एक महीने में व्यवस्था नहीं सुधरी तो 10 जून को जिला पंचायत में जड़ देंगे ताला”
कोरबा। जिला पंचायत सीईओ दिनेश कुमार नाग की कार्यप्रणाली और डीएमएफ फंड के उपयोग को लेकर सोमवार को जिला पंचायत परिसर में जमकर हंगामा देखने को मिला। भाजपा समर्थित जिला पंचायत अध्यक्ष सहित कई जिला पंचायत सदस्य धरने पर बैठ गए। प्रदर्शन में सदस्यों के पति भी सक्रिय रूप से मौजूद रहे, जो पूरे घटनाक्रम के दौरान चर्चा का विषय बना रहा।
धरने के दौरान जिला पंचायत सीईओ पर मनमानी, जनप्रतिनिधियों की अनदेखी और कथित कमीशनखोरी जैसे गंभीर आरोप लगाए गए। अध्यक्ष पवन सिंह ने कहा कि सीईओ की कार्यशैली से जनप्रतिनिधियों में भारी नाराजगी है। उन्होंने दावा किया कि उनके पास सीईओ की कार्यप्रणाली से जुड़ी रिकॉर्डिंग भी मौजूद है।
अध्यक्ष ने कहा कि पिछले 20-25 वर्षों में उनके कार्यकाल के दौरान 16 सीईओ यहां पदस्थ रह चुके हैं, लेकिन वर्तमान सीईओ जैसा रवैया उन्होंने कभी नहीं देखा। उन्होंने आरोप लगाया कि सामान्य सभा को दरकिनार कर मनमाने तरीके से फैसले लिए जा रहे हैं और जनप्रतिनिधियों को तवज्जो नहीं दी जा रही।
तीन घंटे इंतजार, फिर भी नहीं पहुंचे सीईओ
अध्यक्ष पवन सिंह ने बताया कि जिला पंचायत सीईओ दिनेश कुमार नाग को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही थीं। इन्हीं मुद्दों पर चर्चा के लिए उनके चेंबर में जनपद सदस्यों की बैठक बुलाई गई थी, जिसमें निर्माण कार्यों और विकास योजनाओं पर चर्चा होनी थी। बैठक में सीईओ को भी आमंत्रित किया गया था, लेकिन करीब तीन घंटे इंतजार के बाद भी उनके नहीं पहुंचने पर सदस्य नाराज हो गए और जिला पंचायत परिसर में ही धरने पर बैठ गए।
इस दौरान जब जिला पंचायत सीईओ अपने चैंबर से बाहर निकलकर जाने लगे तो सदस्यों ने उन्हें रोककर बात करने का प्रयास किया, लेकिन “अभी टाइम नहीं है” कहकर वे वहां से चले गए। इसके बाद सीईओ के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई।
“जनप्रतिनिधियों की नहीं सुनी गई तो इस्तीफा देंगे”
अध्यक्ष पवन सिंह ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जनप्रतिनिधियों के कार्यों को महत्व नहीं दिया गया और समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो सभी सदस्य इस्तीफा देकर घर बैठने को मजबूर होंगे। उन्होंने प्रशासन को एक महीने का समय देते हुए कहा कि यदि स्थिति नहीं सुधरी तो 10 जून को जिला पंचायत कार्यालय में ताला जड़ दिया जाएगा।
डीएमएफ फंड और कमीशनखोरी के आरोप
धरने के दौरान सदस्यों ने आरोप लगाया कि जिला पंचायत में निर्वाचित प्रतिनिधियों की राय और क्षेत्रीय आवश्यकताओं को नजरअंदाज कर प्रशासनिक स्तर पर एकतरफा फैसले लिए जा रहे हैं। उनका कहना था कि डीएमएफ की राशि जनता के विकास कार्यों के लिए होती है, लेकिन योजनाओं के चयन और स्वीकृति प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती जा रही।
कई सदस्यों ने आरोप लगाया कि अधिकारियों की मनमानी के कारण पंचायत प्रतिनिधियों की भूमिका केवल औपचारिक बनकर रह गई है। साथ ही विकास कार्यों में कथित कमीशनखोरी होने का आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग भी की गई।
धरने और नारेबाजी के चलते जिला पंचायत परिसर में काफी देर तक गहमागहमी का माहौल बना रहा। भाजपा समर्थित सदस्यों ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा बंद नहीं की और कार्यप्रणाली में सुधार नहीं किया, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।

