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जनप्रतिनिधियों को हटाने के नियम अलग-अलग, जानिए किसे जनता हटा सकती है और किसे नहीं

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(CG ई खबर |प्रमुख संपादक : ओम प्रकाश पटेल)

रायपुर। जनप्रतिनिधियों को कार्यकाल के बीच पद से हटाने को लेकर लोगों में अक्सर भ्रम की स्थिति रहती है। छत्तीसगढ़ और भारतीय कानून के अनुसार सभी निर्वाचित प्रतिनिधियों के लिए एक जैसे नियम नहीं हैं। कुछ पदों पर जनता को रिकॉल (Recall) का अधिकार प्राप्त है, जबकि कुछ पदों पर ऐसा कोई प्रावधान नहीं है।

छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम, 1993 के तहत सरपंच और पंच को ग्राम सभा के मतदाता निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत रिकॉल कर सकते हैं। इसके लिए अधिनियम की धारा 21A में स्पष्ट प्रावधान किया गया है।

इसके विपरीत नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायत के पार्षदों के लिए छत्तीसगढ़ नगर पालिका अधिनियम, 1961 में जनता द्वारा रिकॉल या अविश्वास प्रस्ताव से हटाने का कोई प्रावधान नहीं है। यदि किसी पार्षद पर गंभीर आरोप हों, तो उसके विरुद्ध केवल कानून में निर्धारित अयोग्यता या सक्षम प्राधिकारी की कार्रवाई के आधार पर ही पद समाप्त हो सकता है।

वहीं, नगर पालिका अध्यक्ष के लिए अधिनियम की धारा 47 के तहत रिकॉल की व्यवस्था है, लेकिन यह व्यवस्था पार्षदों पर लागू नहीं होती।

दूसरी ओर, विधायक (MLA) और सांसद (MP) को भी जनता सीधे कार्यकाल के दौरान नहीं हटा सकती। भारतीय संविधान और वर्तमान कानून में विधायक या सांसद के लिए रिकॉल (Recall) का कोई प्रावधान नहीं है। वे केवल इस्तीफा, अयोग्यता, न्यायालय के आदेश या अन्य संवैधानिक प्रक्रियाओं के माध्यम से ही पद छोड़ सकते हैं।

संक्षेप में जानिए

  • सरपंच – जनता रिकॉल कर सकती है।
  • पंच – जनता रिकॉल कर सकती है।
  • पार्षद (नगर निगम/नगर पालिका/नगर पंचायत) – जनता रिकॉल या अविश्वास प्रस्ताव से नहीं हटा सकती।
  • विधायक (MLA) – जनता सीधे नहीं हटा सकती।
  • सांसद (MP) – जनता सीधे नहीं हटा सकती।

कानूनी आधार:

  • छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम, 1993 – धारा 21A (सरपंच एवं पंच का रिकॉल)
  • छत्तीसगढ़ नगर पालिका अधिनियम, 1961 – धारा 47 (नगर पालिका अध्यक्ष का रिकॉल; पार्षद के लिए ऐसा प्रावधान नहीं)
  • भारतीय संविधान – विधायक एवं सांसद के लिए जनता द्वारा रिकॉल का कोई प्रावधान नहीं।

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