रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट की ज़मीन को लेकर एक बड़ा मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। रायपुर के एक किसान ने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर कर दावा किया है कि एयरपोर्ट का एक हिस्सा उनकी पुश्तैनी भूमि पर बना है। याचिका में करीब ₹3,500 करोड़ के मुआवज़े की मांग की गई है।
याचिकाकर्ता के अनुसार, वर्ष 1942 में द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान तत्कालीन ब्रिटिश प्रशासन ने एयरफील्ड निर्माण के लिए उनकी पुश्तैनी ज़मीन अस्थायी रूप से अधिग्रहित की थी। उनका कहना है कि युद्ध समाप्त होने के बाद भूमि वापस करने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन आज तक ऐसा नहीं किया गया।
किसान ने अपनी याचिका में दावा किया है कि मांगी गई ₹3,500 करोड़ की राशि में कथित बकाया किराया, उस पर वर्षों का ब्याज और वर्तमान समय के अनुसार भूमि का बाजार मूल्य शामिल है। उनका यह भी कहना है कि इस मामले से जुड़े पुराने सरकारी अभिलेख उनके दावे का समर्थन करते हैं।
फिलहाल यह मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। अदालत की ओर से इस दावे की सत्यता या मुआवज़े के संबंध में अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं दिया गया है। ऐसे में अब सभी की नजरें सर्वोच्च न्यायालय की आगामी सुनवाई और फैसले पर टिकी हैं।


