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हाईकोर्ट के आदेश के चार साल बाद भी नहीं मिला समान वेतन, न्याय की राह देख रहे हजारों नगर सैनिक


रायपुर।
छत्तीसगढ़ के हजारों नगर सैनिक (होमगार्ड) वर्षों से पुलिस आरक्षकों के समान जिम्मेदारियां निभाने के बावजूद समान वेतन और सेवा सुविधाओं से वंचित हैं। वर्ष 2022 में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने "समान कार्य के लिए समान वेतन" के सिद्धांत के आधार पर नगर सैनिकों के पक्ष में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया था। इसके बावजूद आज तक आदेश का पूर्ण पालन नहीं हो सका है, जिससे हजारों नगर सैनिक और उनके परिवार न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी नहीं हुआ पालन

जानकारी के अनुसार, वर्ष 2022 में हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया था कि नगर सैनिकों से पुलिस आरक्षकों के समान कार्य लिया जाता है, इसलिए उन्हें भी समान वेतन और सेवा से जुड़े वैधानिक लाभ दिए जाने चाहिए। न्यायालय के आदेश के बावजूद राज्य सरकार ने लंबे समय तक इसे लागू नहीं किया, जिसके बाद मामला अवमानना तक पहुंच गया।


सुप्रीम कोर्ट से भी नहीं मिली सरकार को राहत

नगर सैनिक संगठन के मुताबिक, हाईकोर्ट के आदेश का पालन नहीं होने पर अवमानना याचिका दायर की गई। इसी बीच राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दाखिल की, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने याचिका खारिज कर दी और हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।

संगठन का दावा है कि सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को न्यायालय के आदेश का पालन करते हुए तीन माह के भीतर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए थे। इसके बावजूद आज तक नगर सैनिकों को समान वेतन और अन्य सेवा सुविधाओं का लाभ नहीं मिल सका है।

पुलिस आरक्षकों जैसी जिम्मेदारी, लेकिन सुविधाएं नहीं

नगर सैनिक चुनाव ड्यूटी, कानून-व्यवस्था, वीआईपी सुरक्षा, धार्मिक आयोजनों, यातायात नियंत्रण, आपदा प्रबंधन और त्योहारों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाते हैं। उनका कहना है कि जब कार्य और जोखिम पुलिस आरक्षकों के समान हैं, तो वेतन और सेवा सुविधाओं में भेदभाव उचित नहीं है।

वर्षों की कानूनी लड़ाई के बाद भी इंतजार

नगर सैनिक संगठन का कहना है कि अधिकारों की लड़ाई वर्षों से न्यायालयों में लड़ी जा रही है। हाईकोर्ट से अनुकूल फैसला मिलने और सुप्रीम कोर्ट में भी राज्य सरकार को राहत नहीं मिलने के बावजूद आदेश का लाभ धरातल पर नहीं पहुंचा है। इससे नगर सैनिकों और उनके परिवारों में निराशा बढ़ रही है।

10 हजार से अधिक परिवार प्रभावित

प्रदेश में 10 हजार से अधिक नगर सैनिक कार्यरत बताए जाते हैं। संगठन का कहना है कि समान वेतन और सेवा लाभ लागू नहीं होने से हजारों परिवार आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं और लंबे समय से न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग

नगर सैनिक संगठन ने राज्य सरकार से मांग की है कि हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का सम्मान करते हुए बिना किसी और विलंब के समान वेतन, सेवा सुरक्षा, भत्ते और अन्य वैधानिक लाभ तत्काल लागू किए जाएं। संगठन का कहना है कि न्यायालय के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद देरी न्याय की भावना के विपरीत है।

सरकार के अगले कदम पर टिकी निगाहें

हाईकोर्ट के आदेश, अवमानना की कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट में राज्य सरकार की याचिका खारिज होने के बाद अब सभी की निगाहें राज्य सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं। नगर सैनिकों का कहना है कि वे वर्षों से अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे हैं और अब उन्हें केवल न्यायालय का फैसला नहीं, बल्कि उसका वास्तविक लाभ मिलने का इंतजार है। यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं होती है तो संगठन ने लोकतांत्रिक और कानूनी तरीके से अपना आंदोलन आगे भी जारी रखने की बात कही है।

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