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जनता पार्षद को क्यों नहीं हटा सकती? जानिए छत्तीसगढ़ का कानून क्या कहता है


रायपुर।
नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायत के पार्षदों को लेकर अक्सर यह सवाल उठता है कि यदि जनता उनके कामकाज से संतुष्ट नहीं है, तो क्या उन्हें कार्यकाल के बीच अविश्वास प्रस्ताव या रिकॉल (Recall) के माध्यम से हटाया जा सकता है? इसका स्पष्ट उत्तर है—नहीं।

छत्तीसगढ़ नगर पालिका अधिनियम, 1961 में पार्षदों के लिए जनता द्वारा रिकॉल (Recall) या अविश्वास प्रस्ताव का कोई प्रावधान नहीं है। इसलिए केवल जनता के विरोध, हस्ताक्षर अभियान, धरना-प्रदर्शन या अविश्वास जताने से किसी पार्षद की सदस्यता समाप्त नहीं की जा सकती।

फिर पार्षद को क्यों नहीं हटाया जा सकता?

क्योंकि कानून ने पार्षद को सीधे जनता द्वारा हटाने का अधिकार नहीं दिया है। जिस प्रकार सरपंच और पंच के लिए छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम, 1993 की धारा 21A में रिकॉल का स्पष्ट प्रावधान है, उसी प्रकार का कोई प्रावधान नगर निगम, नगर पालिका या नगर पंचायत के पार्षदों के लिए नहीं बनाया गया है।

यही कारण है कि पार्षद को केवल जनता की नाराजगी या अविश्वास के आधार पर पद से नहीं हटाया जा सकता।

किन परिस्थितियों में जा सकती है सदस्यता?

यदि कोई पार्षद—

  • कानून में निर्धारित अयोग्यता का पात्र हो जाए,
  • चुनाव के लिए आवश्यक पात्रता खो दे,
  • लाभ का पद धारण कर ले,
  • या अन्य कानूनी कारण सिद्ध हो जाएं,

तो सक्षम प्राधिकारी अधिनियम में निर्धारित प्रक्रिया, जांच और सुनवाई के बाद उसकी सदस्यता समाप्त कर सकता है।

क्या कलेक्टर सीधे हटा सकता है?

नहीं। कलेक्टर भी किसी पार्षद को केवल जनता की मांग या शिकायत के आधार पर नहीं हटा सकता। कार्रवाई तभी संभव है जब छत्तीसगढ़ नगर पालिका अधिनियम, 1961 में दिए गए वैधानिक आधार मौजूद हों और विधिसम्मत प्रक्रिया का पालन किया जाए।

कानून का निष्कर्ष

  • सरपंच और पंच – जनता को रिकॉल का अधिकार।
  • नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायत के पार्षद – जनता को रिकॉल या अविश्वास प्रस्ताव का अधिकार नहीं।
  • ⚖️ पार्षद की सदस्यता केवल कानून में निर्धारित अयोग्यता या अन्य वैधानिक कारणों के आधार पर ही समाप्त की जा सकती है।

कानूनी आधार:

  • छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम, 1993 – धारा 21A (सरपंच एवं पंच का रिकॉल)
  • छत्तीसगढ़ नगर पालिका अधिनियम, 1961 – पार्षद के लिए जनता द्वारा रिकॉल का कोई प्रावधान नहीं; सदस्यता समाप्ति केवल अधिनियम में निर्धारित वैधानिक आधारों पर ही संभव है।

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