कोरबा (CG ई खबर ) सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मांगी गई जानकारी को लेकर जल संसाधन विभाग का जवाब अब सवालों के घेरे में आ गया है। विभाग ने आवेदक को भेजे अपने पत्र में यह कहते हुए जानकारी देने से इंकार कर दिया कि मांगी गई सूचना उसके क्षेत्राधिकार में नहीं आती, जबकि आवेदन जल संसाधन विभाग के अधीन शासकीय आवासों और क्वार्टरों से संबंधित था।
CG ई खबर के संपादक ओमप्रकाश पटेल द्वारा सूचना के अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत जल संसाधन विभाग से विभाग के अधीन स्थित शासकीय आवासों/क्वार्टरों की जानकारी मांगी गई थी। इसके जवाब में कार्यालय ने 9 जुलाई 2026 को जारी पत्र में लिखा कि संबंधित जानकारी उनके कार्यालय के क्षेत्राधिकार में नहीं आती, इसलिए जानकारी उपलब्ध कराना संभव नहीं है।

जल संसाधन विभाग का जवाब
अब उठ रहे हैं ये सवाल

यदि जानकारी संबंधित कार्यालय के पास नहीं थी, तो RTI आवेदन को संबंधित लोक सूचना अधिकारी (PIO) को धारा 6(3) के तहत स्थानांतरित क्यों नहीं किया गया?
क्या विभाग ने सूचना देने की जिम्मेदारी से बचने का प्रयास किया?
जब शासकीय आवास जल संसाधन विभाग से जुड़े हैं, तो फिर किस विभाग के पास उनका रिकॉर्ड उपलब्ध है?
क्या आवेदक को सही विभाग की जानकारी देना विभाग की जिम्मेदारी नहीं थी?
सूचना के अधिकार अधिनियम के जानकारों का कहना है कि यदि मांगी गई सूचना किसी अन्य लोक प्राधिकरण के पास उपलब्ध हो, तो संबंधित विभाग को आवेदन पांच दिनों के भीतर सक्षम प्राधिकारी को स्थानांतरित करना चाहिए। केवल "हमारे क्षेत्राधिकार में नहीं है" कहकर आवेदन का निस्तारण करना RTI की भावना के अनुरूप नहीं माना जाता।
अब इस मामले में विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। यह देखना होगा कि आवेदक इस जवाब के खिलाफ प्रथम अपील करता है या राज्य सूचना आयोग का दरवाजा खटखटाता है।
CG ई खबर इस मामले पर आगे की कार्रवाई और विभाग के पक्ष को भी प्रमुखता से प्रकाशित करेगा।


