कोरबा: वन विभाग में पौधारोपण घोटाले का नया मामला, 59 हेक्टेयर ‘गायब’ जमीन पर उठाई गई लाखों की राशि

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क्षतिपूर्ति वृक्षारोपण के नाम पर फर्जी रिकॉर्ड, कैम्पा मद के करोड़ों रुपये सवालों के घेरे में

(CG ई खबर | बिलासपुर संभाग ब्यूरो चीफ : विजय चौहान)

कोरबा। जिले के वन विभाग में एक बार फिर पौधारोपण के नाम पर बड़े पैमाने पर अनियमितताओं और संभावित भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। कटघोरा वन मंडल अंतर्गत पसान रेंज में संचालित क्षतिपूर्ति वृक्षारोपण कार्यक्रम के तहत लाखों रुपये की राशि जारी की गई, लेकिन जिन जमीनों पर रोपण दिखाया गया है, उनका एक बड़ा हिस्सा वास्तव में मौजूद ही नहीं पाया गया।

‘गायब’ जमीन पर कागजी पौधारोपण

जानकारी के अनुसार पसान रेंज के कक्ष क्रमांक P187 और P221 में कुल 120 हेक्टेयर भूमि पर वृक्षारोपण स्वीकृत किया गया था। जांच में सामने आया कि इनमें से लगभग 59 हेक्टेयर भूमि या तो गांव की आबादी क्षेत्र में आती है या फिर जमीन का कोई भौतिक अस्तित्व ही नहीं है। इसके बावजूद इन क्षेत्रों में पौधारोपण दर्शाकर शासन से भारी-भरकम राशि आहरित कर ली गई।


पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे घोटाले

यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी कटघोरा वन मंडल में मिसिंग भूमि पर पौधारोपण, बोरवेल निर्माण के फर्जी दावे जैसे कई घोटाले उजागर हो चुके हैं, लेकिन न तो जिम्मेदार अधिकारियों पर ठोस कार्रवाई हुई और न ही शासन राशि की प्रभावी रिकवरी।

निर्माण कार्यों में भी नियमों की अनदेखी

पसान रेंज क्षेत्र में बनाए जा रहे चौकीदार कक्ष के निर्माण में भी गंभीर गड़बड़ी सामने आई है। शासन के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद फ्लाई ऐश ईंटों के स्थान पर लाल ईंटों का उपयोग किया गया, जो नियमों का खुला उल्लंघन है।

मैदानी कार्य में भारी लापरवाही

निरीक्षण के दौरान रोपण हेतु लाए गए पौधे, खाद और अन्य सामग्री इधर-उधर बिखरी पड़ी मिली। कार्य योजना से संबंधित शिलापट्टिका भी मौके पर मौजूद नहीं थी, जिससे कार्य की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

कैम्पा मद से जारी की गई राशि

  • कक्ष P187

    • प्रथम वर्ष: ₹205.89 लाख
    • द्वितीय वर्ष: ₹98.26 लाख
  • कक्ष P221

    • प्रथम वर्ष: ₹255.80 लाख
    • द्वितीय वर्ष: ₹121.84 लाख

सवाल यह है कि जिस जमीन का अस्तित्व ही नहीं, उस पर जारी की गई यह करोड़ों की राशि आखिर गई कहां?

क्या है क्षतिपूर्ति वृक्षारोपण?

वन संरक्षण अधिनियम, 1980 के तहत जब किसी गैर-वानिकी परियोजना—जैसे खनन, सड़क या उद्योग—के लिए वन भूमि का उपयोग किया जाता है, तो उसके बदले उतनी या अधिक भूमि पर नया वन विकसित करना अनिवार्य होता है। इसी उद्देश्य से क्षतिपूर्ति वृक्षारोपण किया जाता है, ताकि पर्यावरणीय क्षति की भरपाई हो सके।

रेंजर का पक्ष नहीं आया सामने

मामले में पसान रेंज के रेंजर मनीष सिंह से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन समाचार लिखे जाने तक उनका पक्ष प्राप्त नहीं हो सका।

निष्पक्ष जांच की मांग तेज

यह पूरा मामला वन विभाग में व्याप्त प्रशासनिक लापरवाही और संभावित भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है। पर्यावरण संरक्षण के नाम पर जारी करोड़ों रुपये की राशि का सही उपयोग सुनिश्चित करने और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग अब तेज हो गई है।
जनहित में इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष, स्वतंत्र और पारदर्शी जांच बेहद आवश्यक है।

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