युवती ने प्रेमी के शक और मानसिक प्रताड़ना से तंग आकर लगाई फांसी

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घटना के एक माह बाद गिरफ्तार हुआ आरोपी, जेल भेजा गया

(CG ई खबर | बिलासपुर संभाग ब्यूरो चीफ : विजय चौहान)

कोरबा। जिले में एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहाँ 17 वर्षीय नाबालिग युवती ने अपने प्रेमी द्वारा लगातार किए जा रहे शक, चरित्र पर आरोप और मानसिक प्रताड़ना से परेशान होकर आत्महत्या कर ली। मामले में पुलिस ने घटना के लगभग एक माह बाद 20 वर्षीय आरोपी प्रेमी दिलराज मरकाम को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।

जंगल में मिला था शव

परिजनों के अनुसार, 27 नवंबर की रात युवती घर लौटकर सो गई थी। अगली सुबह वह घर पर नहीं मिली। परिजनों द्वारा लगातार खोजबीन किए जाने के बाद 29 नवंबर को कोरबी चौकी क्षेत्र अंतर्गत पाली गांव के पास जंगल में एक पेड़ से उसका शव फांसी के फंदे पर लटका हुआ मिला। इस घटना से पूरे इलाके में शोक और आक्रोश का माहौल बन गया।

लगातार शक और अपमान से थी मानसिक तनाव में

मृतका के परिजनों ने पुलिस को बताया कि आरोपी दिलराज मरकाम लगातार युवती के चरित्र पर संदेह करता था। वह उसे बेवफाई के आरोप लगाकर अपमानित करता, मानसिक रूप से प्रताड़ित करता और बार-बार विवाद करता था। इन हरकतों के कारण युवती गहरे मानसिक तनाव में चली गई थी। परिजनों का आरोप है कि लापता होने से पहले दोनों के बीच हुए विवाद के बाद ही उसने यह आत्मघाती कदम उठाया।

आरोपी ने स्वीकार किया अपराध

परिजनों की शिकायत पर कोरबी चौकी पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पूछताछ के दौरान आरोपी ने मृतका के साथ प्रेम संबंध और उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित करने की बात स्वीकार की।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नीतिश ठाकुर ने बताया कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जहाँ से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। मामले की विस्तृत विवेचना जारी है।

युवा रिश्तों में बढ़ती मानसिक हिंसा चिंता का विषय

यह घटना युवा रिश्तों में बढ़ती मानसिक हिंसा, असुरक्षा और नियंत्रण की प्रवृत्ति पर गंभीर सवाल खड़े करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि शक और ईर्ष्या के नाम पर लगातार मानसिक दबाव बनाना भावनात्मक दुर्व्यवहार की श्रेणी में आता है, जिसके परिणाम कई बार जानलेवा साबित हो जाते हैं।
समाज और परिवारों को चाहिए कि वे युवाओं को स्वस्थ रिश्तों, संवाद और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करें, ताकि ऐसी दुखद घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

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