काग़ज़ों पे तालाब, हकीकत में दरिया नहीं,आवाज उठी सावित्री ने, पर जवाब में खामोशी ही मिली।
कोरबा — कोरबा वन परिक्षेत्र के तहत ग्राम नकटीखार में वर्ष 2024–25 में स्वीकृत कराए गये तालाब निर्माण कार्य में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियों और भ्रष्टाचार की शिकायत सामने आई है। कुल लागत ₹23,55,625 बताई गई परियोजना में केवल 5–6 लाख रुपये खर्च करके पुराने नाले को तालाब में तब्दील कर दिया गया, जबकि शेष राशि के कथित बंदरबांट के आरोप लगाए जा रहे हैं।
जिला पंचायत सदस्य एवं सभापति (वन विभाग) सावित्री अजय कंवर ने मामले की शिकायत करते हुए पृथक् जांच की मांग की। शिकायत के मुताबिक मौके पर जाकर सावित्री ने पाया कि तालाब निर्माण में बताई गई रकम में से वास्तविक काम के अनुरूप खर्च नहीं किया गया है और बिल व दस्तावेज़ों में अनियमितताएँ हैं।
खास बात यह है कि शिकायत के बाद शुरू की गई जांच की जिम्मेदारी उसी अधिकारी को सौंपी गई है जिस पर आरोप लगे हैं — कोरबा रेंजर मृत्युंजय शर्मा। शिकायतकर्ता का पत्र जारी करने और जांच संचालन दोनों कार्य रेंजर द्वारा ही किए जा रहे हैं, जिसे लेकर पारदर्शिता पर सवाल उठे हैं। स्थानीय लोग और शिकायतकर्ता आरोप लगाते हैं कि रेंजर द्वारा जांच में लीपापोती की जा रही है और जांच दोषपूर्ण है।
पूर्व में भी वन विभाग में भ्रष्टाचार की शिकायतें सामने आ चुकी हैं — इसी संदर्भ में प्रतिनिधियों ने मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच कर दोषियों को कठोर कार्रवाई के रूप में सुझाने की मांग की है। शिकायत में स्पष्ट अनुरोध है कि इस प्रकरण की यथोचित जाँच पृथक टीम से कराई जाए और पाए गए तथ्यों के आधार पर जवाबदेही तय की जाए।
शिकायतकर्ता का कहना: सावित्री अजय कंवर ने स्थानीय निरीक्षण के हवाले से बताया कि तालाब में बताई गई राशि के अनुरूप कार्य नज़र नहीं आया और दस्तावेज़ों में विरोधाभास हैं। उनका कहना है कि यदि दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो यह घटना वन विभाग के पुराने घोटालों की कड़ी साबित होगी।
क्या होगा आगे? शिकायत दर्ज होने और मांग उठने के बाद जांच आधिकारिक तौर पर आगे बढ़ी है, लेकिन शिकायतकर्ता व स्थानीय लोग इस जांच की निष्पक्षता पर संदेह जता रहे हैं और स्वतंत्र जांच टीम तैनात करने की मांग कर रहे हैं।
(CG ई खबर — कोरबा ब्यूरो)


