(CG ई खबर | प्रमुख संपादक : ओम प्रकाश पटेल)
सरपंच उमा कंवर के नाम वाले दस्तावेजों पर अजय कंवर के हस्ताक्षर का वीडियो, उपसरपंच भी मौके पर मौजूद; नौकरी से जुड़े दस्तावेजों ने पूरे मामले को बनाया गंभीर
कुसमुंडा। ग्राम पंचायत की निर्वाचित सरपंच के अधिकारों और उनके नाम से किए जा रहे दस्तावेजी कामकाज को लेकर एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पंचायत व्यवस्था से लेकर SECL प्रबंधन तक कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मामले में सामने आए वीडियो में SECL कर्मचारी और सरपंच उमा कंवर के पति अजय कंवर L&R कार्यालय के भीतर बैठे दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में वह अपनी पत्नी यानी निर्वाचित सरपंच उमा कंवर के नाम से दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करते हुए स्पष्ट नजर आते हैं।
मामला इसलिए और गंभीर हो जाता है क्योंकि बताया जा रहा है कि ये दस्तावेज KNR कंपनी में रोजगार/नौकरी से संबंधित प्रक्रिया से जुड़े हैं।
वीडियो में ग्राम पंचायत के उपसरपंच सुरेश पटेल की मौजूदगी भी दिखाई दे रही है।
अब सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि दस्तावेज पर किसने हस्ताक्षर किए।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि निर्वाचित सरपंच की जगह उनके पति को उनके नाम से हस्ताक्षर करने का अधिकार आखिर किसने दिया?
कैमरे के सामने पत्नी के नाम से हस्ताक्षर, फिर किस अधिकार से?
सामने आए वीडियो में जो दृश्य दिखाई दे रहा है, वह पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है।
वीडियो में अजय कंवर दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करते नजर आते हैं। दावा है कि ये हस्ताक्षर सरपंच उमा कंवर के नाम से किए जा रहे थे।
अगर मूल दस्तावेजों में भी यही स्थिति सामने आती है, तो सवाल बेहद सीधा है—
सरपंच के हस्ताक्षर करने का अधिकार उनके पति के पास कब से आ गया?
क्या सरपंच पद के अधिकार पति को हस्तांतरित किए जा सकते हैं?
क्या पंचायत के आधिकारिक दस्तावेजों पर निर्वाचित प्रतिनिधि की जगह उनके पति हस्ताक्षर कर सकते हैं?
और यदि इसके लिए कोई लिखित अनुमति या प्राधिकरण था, तो वह अनुमति किस नियम के तहत दी गई थी?
अब इस पूरे मामले का जवाब वीडियो से ज्यादा मूल दस्तावेज और संबंधित रिकॉर्ड मांग रहे हैं।
मामला नौकरी से जुड़ा तो सवाल और भी गंभीर
बताया जा रहा है कि जिस दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए जा रहे थे, वह KNR कंपनी में रोजगार/नौकरी दिलाने से संबंधित प्रक्रिया का हिस्सा था।
यानी मामला किसी सामान्य निजी कागज तक सीमित नहीं बताया जा रहा, बल्कि रोजगार से जुड़े दस्तावेजों तक पहुंचता है।
ऐसे में जांच का दायरा भी बड़ा होना चाहिए।
किस व्यक्ति के रोजगार के लिए दस्तावेज तैयार हुआ?
उस दस्तावेज में सरपंच की भूमिका क्या थी?
सरपंच के नाम से हस्ताक्षर क्यों आवश्यक था?
जब सरपंच स्वयं निर्वाचित पद पर हैं तो उनकी जगह पति ने हस्ताक्षर क्यों किए?
और सबसे अहम—
क्या किसी व्यक्ति को रोजगार दिलाने की प्रक्रिया में पंचायत पद और उसके अधिकार का इस्तेमाल किया गया?
SECL की वर्दी में L&R कार्यालय—एक अलग सवाल
मामले का दूसरा पहलू अजय कंवर की SECL कर्मचारी के रूप में पहचान से जुड़ा है।
वीडियो में वह SECL की वर्दी में L&R कार्यालय के अंदर दिखाई दे रहे हैं।
अब SECL प्रबंधन के सामने यह सवाल भी खड़ा है कि कंपनी का कर्मचारी उस समय L&R कार्यालय में किस कार्य से मौजूद था।
यदि वीडियो की तारीख और समय की पुष्टि होती है, तो SECL को अपने रिकॉर्ड से यह स्पष्ट करना चाहिए कि—
उस समय अजय कंवर की ड्यूटी कहां थी?
क्या वह ड्यूटी अवधि थी?
क्या उन्हें L&R कार्यालय जाने की अनुमति थी?
क्या कंपनी के सेवा एवं आचरण नियम किसी कर्मचारी को कंपनी की वर्दी में इस तरह के निजी अथवा पंचायत संबंधी कार्य में शामिल होने की अनुमति देते हैं?
और यदि नियमों का उल्लंघन हुआ है तो SECL प्रबंधन की विभागीय कार्रवाई कहां तक पहुंचेगी?
वीडियो में उपसरपंच भी मौजूद, फिर उनकी भूमिका क्या थी?
वीडियो में ग्राम पंचायत के उपसरपंच सुरेश पटेल की मौजूदगी भी दिखाई देती है।
यह मौजूदगी अपने आप में किसी अपराध का प्रमाण नहीं है, लेकिन घटनास्थल पर उनकी उपस्थिति के कारण जांच में उनसे भी यह पूछा जाना स्वाभाविक है कि वे वहां किस काम से पहुंचे थे।
क्या उन्हें दस्तावेज पर अजय कंवर द्वारा हस्ताक्षर किए जाने की जानकारी थी?
क्या उन्होंने पूरी प्रक्रिया देखी?
क्या उन्हें पता था कि दस्तावेज सरपंच उमा कंवर के नाम से तैयार किया गया है?
क्या उन्होंने इस पर कोई आपत्ति की?
इन सवालों का जवाब उपसरपंच के बयान और कार्यालयीन रिकॉर्ड से सामने आना चाहिए।
यहां यह स्पष्ट रहना जरूरी है कि केवल मौके पर मौजूद होने के आधार पर उपसरपंच को किसी गलत कृत्य का जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
अब पंचायत प्रशासन की भी परीक्षा
यदि निर्वाचित सरपंच के नाम और अधिकार का इस्तेमाल किसी दूसरे व्यक्ति द्वारा किया गया है, तो मामला पंचायत प्रशासन के लिए भी गंभीर है।
जनपद पंचायत और जिला पंचायत को यह देखना चाहिए कि संबंधित दस्तावेज किस आधार पर तैयार हुआ और उस पर हस्ताक्षर किसने किए।
यदि किसी व्यक्ति ने सरपंच के अधिकार का अनधिकृत इस्तेमाल किया है, तो पंचायत प्रशासन को पूरे मामले की जांच करनी चाहिए।
साथ ही यह भी देखा जाना चाहिए कि रोजगार संबंधी प्रक्रिया में पंचायत पद का किसी व्यक्ति को लाभ पहुंचाने के लिए इस्तेमाल तो नहीं हुआ।
BNS के तहत भी जांच की जरूरत
यदि जांच में यह प्रमाणित होता है कि अजय कंवर ने बिना वैध अधिकार अपनी पत्नी के नाम से दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए और उस दस्तावेज को वास्तविक सरपंच द्वारा हस्ताक्षरित दस्तावेज के रूप में इस्तेमाल किया गया, तो दस्तावेज की प्रकृति और कथित उद्देश्य के आधार पर भारतीय न्याय संहिता की जालसाजी संबंधी धाराओं के तहत कार्रवाई की संभावना की जांच की जा सकती है।
मामले में BNS की धारा 336 (Forgery) और फर्जी दस्तावेज के इस्तेमाल से संबंधित धारा 340 की applicability सहित अन्य संबंधित प्रावधानों पर जांच एजेंसी द्वारा विचार किया जा सकता है।
यदि किसी दूसरे व्यक्ति के रूप में प्रस्तुत होकर धोखा देने के तत्व सामने आते हैं, तो personation से संबंधित प्रावधानों की भी जांच हो सकती है।
लेकिन इन धाराओं का अंतिम निर्धारण पुलिस द्वारा मूल दस्तावेज, वीडियो, हस्ताक्षर, गवाहों और अन्य साक्ष्यों की जांच के बाद ही किया जाना चाहिए।
क्या SECL कर्मचारी पर विभागीय कार्रवाई होगी?
अब SECL प्रबंधन की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
यदि विभागीय जांच में यह प्रमाणित होता है कि अजय कंवर ने कंपनी के नियमों का उल्लंघन किया, ड्यूटी से संबंधित नियम तोड़े या किसी अनुचित गतिविधि में SECL कर्मचारी के रूप में अपनी स्थिति का इस्तेमाल किया, तो उनके खिलाफ लागू सेवा एवं आचरण नियमों के तहत विभागीय कार्रवाई का सवाल उठ सकता है।
यदि किसी आपराधिक कृत्य में उनकी भूमिका भी जांच में प्रमाणित होती है, तो मामला और गंभीर हो सकता है।
हालांकि केवल वीडियो सामने आने से किसी कर्मचारी की नौकरी स्वतः समाप्त नहीं होती। इसके लिए SECL की निर्धारित विभागीय जांच और प्राकृतिक न्याय की प्रक्रिया जरूरी होगी।
अब प्रशासन से सीधे सवाल
▶ सरपंच उमा कंवर के नाम से दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने वाले अजय कंवर को यह अधिकार किसने दिया?
▶ क्या उनके पास सरपंच की ओर से हस्ताक्षर करने की कोई लिखित अनुमति थी?
▶ यदि अनुमति थी तो वह किस नियम के तहत दी गई थी?
▶ दस्तावेज पर किए गए हस्ताक्षर की जांच कराई जाएगी या नहीं?
▶ जिस दस्तावेज पर हस्ताक्षर हुए, उसका वास्तविक लाभार्थी कौन है?
▶ KNR में रोजगार की प्रक्रिया में इस दस्तावेज की भूमिका क्या थी?
▶ SECL की वर्दी में L&R कार्यालय पहुंचने वाले कर्मचारी की उस समय ड्यूटी कहां दर्ज थी?
▶ L&R कार्यालय के CCTV में पूरी घटना रिकॉर्ड हुई है या नहीं?
▶ मौके पर मौजूद उपसरपंच को इस प्रक्रिया की जानकारी थी या नहीं?
▶ पंचायत प्रशासन निर्वाचित सरपंच के नाम और अधिकार के कथित इस्तेमाल की जांच कब करेगा?
▶ SECL प्रबंधन अपने कर्मचारी से इस मामले में क्या स्पष्टीकरण मांगता है?
वीडियो ने खोल दिया सवालों का पिटारा
यह मामला अब सिर्फ एक हस्ताक्षर का नहीं रह गया है।
एक तरफ वीडियो में SECL की वर्दी पहने अजय कंवर दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करते दिखाई दे रहे हैं, वहीं दावा है कि दस्तावेज सरपंच उमा कंवर के नाम से संबंधित हैं। दूसरी तरफ मौके पर उपसरपंच की मौजूदगी भी दिखाई देती है और दस्तावेजों को रोजगार प्रक्रिया से जोड़कर देखा जा रहा है।
ऐसे में अब गेंद पंचायत प्रशासन, L&R कार्यालय और SECL प्रबंधन के पाले में है।
सवाल यह नहीं कि वीडियो सामने आया या नहीं।
सवाल यह है कि वीडियो में दिखाई दे रहे इस कृत्य की वैधानिकता क्या थी?
यदि सरपंच की जगह उनके पति ने उनके नाम से हस्ताक्षर किए, तो यह अधिकार उन्हें किसने दिया?
और यदि ऐसा कोई अधिकार नहीं था, तो जिम्मेदारी तय करने की कार्रवाई कब होगी?
अब इस पूरे मामले में वीडियो, मूल दस्तावेज, हस्ताक्षर, CCTV फुटेज, SECL ड्यूटी रिकॉर्ड और संबंधित लोगों के बयान ही तय करेंगे कि इस मामले की वास्तविक सच्चाई क्या है और जिम्मेदारी किसकी बनती है।
CG ई खबर इस मामले में संबंधित सरपंच, अजय कंवर, उपसरपंच, SECL प्रबंधन और पंचायत प्रशासन का पक्ष सामने आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित करेगा।


