झोलाछाप डॉक्टरों का खतरा: बिना रजिस्ट्रेशन इलाज बना जानलेवा, इंजेक्शन से 12 वर्षीय बालक का पैर हुआ निष्क्रिय

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कोरबा (CG ई ख़बर | प्रमुख संपादक : ओम प्रकाश पटेल) कोरबा/दीपका
इलाज के नाम पर लापरवाही और बिना वैध डॉक्टरी पंजीयन प्रैक्टिस कर रहे झोलाछाप डॉक्टर आम लोगों की जान के लिए गंभीर खतरा बनते जा रहे हैं। ऐसा ही एक चौंकाने वाला मामला दीपका क्षेत्र से सामने आया है, जहां कथित चिकित्सकीय लापरवाही के चलते एक 12 वर्षीय बालक का दाहिना पैर हमेशा के लिए निष्क्रिय हो गया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, विकास कुमार चन्द्रा (12 वर्ष) पिता अशोक कुमार चन्द्रा, निवासी सोमवारी बाजार, दीपका का 26 फरवरी 2025 को विजय नगर दीपका स्थित स्थानीय डॉक्टर दिनेश कुमार सूरज के क्लीनिक में इलाज कराया गया। इलाज के दौरान चिकित्सक द्वारा एक इंजेक्शन लगाया गया, जिसके कुछ ही देर बाद बालक का दाहिना पैर सुन्न हो गया और धीरे-धीरे चलने योग्य नहीं रह गया।

घटना के बाद परिजनों ने जब मामले की शिकायत कलेक्टर को की, तो एसडीएम कटघोरा द्वारा जांच समिति गठित की गई। जांच के पश्चात यह तथ्य सामने आया कि संबंधित डॉक्टर बिना वैध डॉक्टरी रजिस्ट्रेशन के इलाज कर रहा था और उपचार में गंभीर लापरवाही बरती गई।

जांच रिपोर्ट कार्यालय अनुविभागीय अधिकारी (दंडाधिकारी), कटघोरा से प्राप्त होने के बाद परिजनों ने दीपका थाना में लिखित शिकायत दर्ज कराई। इस मामले में खंड चिकित्सा अधिकारी, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कटघोरा, डॉ. रश्मि लता की रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने आरोपी डॉक्टर दिनेश कुमार सूरज के विरुद्ध धारा 125(b)-BNS के तहत अपराध पंजीबद्ध कर लिया है।

जनस्वास्थ्य पर बड़ा सवाल

यह घटना केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए चेतावनी है। बिना डिग्री, बिना पंजीयन और बिना नियमों का पालन किए इलाज करने वाले झोलाछाप डॉक्टर न केवल कानून का उल्लंघन कर रहे हैं, बल्कि मासूम जिंदगियों को स्थायी नुकसान पहुंचा रहे हैं।

जागरूकता जरूरी

स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन द्वारा समय-समय पर चेतावनी के बावजूद ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में झोलाछाप डॉक्टर सक्रिय हैं। आम जनता से अपील है कि:

  • इलाज से पहले डॉक्टर का मेडिकल रजिस्ट्रेशन नंबर अवश्य जांचें
  • सस्ते और त्वरित इलाज के लालच में अवैध क्लीनिकों से बचें
  • संदिग्ध डॉक्टरों की सूचना तुरंत स्वास्थ्य विभाग या प्रशासन को दें

यह मामला साबित करता है कि गलत हाथों में इलाज, जीवनभर की सजा बन सकता है। प्रशासनिक कार्रवाई के साथ-साथ समाज की जागरूकता ही इस खतरे पर रोक लगा सकती है।

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