भू-विस्थापितों के आक्रोश से गेवरा खदान पर संकट, 26 दिसंबर को घेराव व खदान बंद का ऐलान

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(CG ई खबर | बिलासपुर संभाग ब्यूरो चीफ : विजय चौहान)

कोरबा, छत्तीसगढ़। कोरबा जिले की गेवरा कोयला खदान एक बार फिर बड़े आंदोलन की जद में आ गई है। पोंडी, बाहनपाठ एवं अमगांव गांवों के भू-विस्थापितों ने बढ़े हुए मुआवजे और वैकल्पिक रोजगार की वर्षों से लंबित मांगों को लेकर 26 दिसंबर को खदान बंद करने तथा एसईसीएल कार्यालय घेराव की घोषणा की है।

भू-विस्थापित एकता मंच के नेता मनोज राठौर ने बताया कि एसईसीएल प्रबंधन द्वारा लगातार आश्वासन दिए जाने के बावजूद समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, जिससे विस्थापितों में भारी आक्रोश है। उन्होंने कहा कि एक ही अधिसूचना के तहत भूमि अधिग्रहण होने के बावजूद नरईबोध, भठोरा सहित अन्य गांवों के विस्थापितों को कंपनी के बोर्ड प्रस्ताव दिनांक 8 अगस्त 2022 के अनुसार बढ़ा हुआ मुआवजा दिया गया, जबकि पोंडी, बाहनपाठ और अमगांव के विस्थापित इससे वंचित हैं।

इसके साथ ही खदान में वैकल्पिक रोजगार उपलब्ध कराने का जो वादा किया गया था, वह 14 वर्षों बाद भी पूरा नहीं हो पाया है, जिससे विस्थापित परिवारों की आर्थिक स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है।

इस मुद्दे पर जनपद सदस्य नेहा राजेंद्र सिंह तंवर ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है। उन्होंने कहा,

“जब तक भू-विस्थापितों की समस्याओं का समाधान नहीं होगा, तब तक खदान विस्तार का कोई भी कार्य नहीं होने दिया जाएगा। पहले न्याय, फिर विकास।”

विस्थापितों द्वारा गेवरा प्रबंधन एवं जिला प्रशासन को कई बार ज्ञापन सौंपे गए, लेकिन किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई न होने से मजबूर होकर आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा है।

यह घेराव एवं खदान बंद आंदोलन जनपद सदस्य नेहा राजेंद्र सिंह तंवर, मनोज राठौर सहित अन्य भू-विस्थापित नेताओं के नेतृत्व में शांतिपूर्ण रूप से किया जाएगा।

संपर्क:
भू-विस्थापित नेता मनोज राठौर – 8319303357

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