(CG ई खबर | बिलासपुर संभाग ब्यूरो चीफ : विजय चौहान)
कोरबा। दक्षिण-पूर्वी कोयला क्षेत्र लिमिटेड (एसईसीएल) की गेवरा परियोजना से प्रभावित ग्राम पोड़ी, बाहनपाठ एवं आमगांव के विस्थापित ग्रामीणों और कंपनी अधिकारियों के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुई, जिसमें लंबित मांगों पर विस्तार से चर्चा हुई, लेकिन जमीनी स्तर पर समस्याओं का स्थायी समाधान अब भी एक ज्वलंत मुद्दा बना हुआ है।
यह वार्ता ऐसे समय में हुई है, जब गेवरा क्षेत्र के अन्य विस्थापित गांवों में मुआवजा, रोजगार और पुनर्वास को लेकर आंदोलन तेज हो चुके हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है।
बैठक में चर्चा के प्रमुख बिंदु
बैठक के दौरान विस्थापितों के प्रतिनिधियों ने अपनी मांगें अधिकारियों के समक्ष रखीं, जिन पर निम्न बिंदुओं पर सहमति और आश्वासन मिला—
- वैकल्पिक रोजगार: विस्थापितों के लिए वैकल्पिक रोजगार के साधनों पर चर्चा की गई। इस संबंध में ग्रामीणों से प्रस्ताव (फॉर्म) लिए जाने का निर्णय लिया गया।
- मकान मुआवजे की बढ़ी दर: मकान मुआवजे की बढ़ी हुई दर के लिए पहले से दिए गए आवेदनों को संबंधित कमेटी के समक्ष भेजने पर सहमति बनी।
- बसाहट राशि में वृद्धि: विस्थापन (बसाहट) राशि की बढ़ी दर के लिए प्रस्तुत आवेदनों को भी कमेटी में विचारार्थ भेजने का आश्वासन दिया गया।
- संवेदनशील मामले: मृतक महिला विस्थापित के परिवार को बसाहट राशि देने तथा विवाहित बेटी को राशि दिलाने जैसे मामलों को भी कमेटी के समक्ष रखने पर सहमति बनी।
- ठेका कार्य: विस्थापितों को ठेका कार्य उपलब्ध कराने के मुद्दे पर भी विस्तार से चर्चा की गई।
एसईसीएल अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि बढ़े हुए मकान मुआवजे और बसाहट राशि से जुड़े मामलों का त्वरित निपटान किया जाएगा। साथ ही, पोड़ी, बाहनपाठ और आमगांव के ग्रामीणों से बढ़ी दर पर मुआवजा और बसाहट राशि के लिए एक सामूहिक ज्ञापन प्रस्तुत करने का सुझाव भी दिया गया।
शांत वार्ता के पीछे का उग्र संदर्भ
यह बैठक भले ही शांतिपूर्ण रही हो, लेकिन इसके पीछे गेवरा क्षेत्र में लंबे समय से सुलग रहा आक्रोश साफ झलकता है। विस्थापित ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से आश्वासन तो मिलते रहे हैं, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई है।
प्रमुख मांगें एवं आंदोलन
- नराईबोध गांव के विस्थापितों ने 12 दिसंबर से अनिश्चितकालीन गेट जाम और खदान बंदी की घोषणा की है। उनका आरोप है कि पुराने त्रिपक्षीय समझौतों के बावजूद रोजगार, उचित मुआवजा और पुनर्वास की मांगें पूरी नहीं की गईं।
- 16 दिसंबर 2025 को छत्तीसगढ़ किसान सभा और भूविस्थापित रोज़गार एकता संघ के नेतृत्व में सैकड़ों विस्थापितों ने गेवरा क्षेत्र के महाप्रबंधक कार्यालय का महाघेराव किया।
- प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगों में स्थायी रोजगार, ₹10–15 लाख तक बसाहट राशि का शीघ्र भुगतान और अधूरे मुआवजे का निपटान शामिल है।
संवेदनशील मुद्दे और विरोध
महिला विस्थापितों के अधिकार इस संघर्ष का एक अहम मुद्दा बनकर उभरे हैं।
- 5 दिसंबर को जिला महिला कांग्रेस कमेटी ने गेवरा कार्यालय का घेराव कर विधवाओं, परित्यक्त महिलाओं और विवाहित बेटियों को बसाहट राशि से वंचित रखने का विरोध किया था।
- अक्टूबर 2025 में एक शांतिपूर्ण आंदोलन के दौरान सीआईएसएफ जवानों द्वारा किए गए लाठीचार्ज की घटना ने हालात को और तनावपूर्ण बना दिया, जिसमें कई विस्थापित घायल हुए थे।
सहमति से आगे का रास्ता
पोड़ी, बाहनपाठ और आमगांव के विस्थापितों के साथ हुई यह बैठक एक सकारात्मक पहल मानी जा रही है। हालांकि, वर्षों से संघर्ष कर रहे विस्थापित अब “करो या मरो” की मनोदशा में हैं।
16 दिसंबर को ही कई गांवों में बड़े आंदोलन प्रस्तावित हैं। ऐसे में, इस बैठक में दिए गए आश्वासनों पर कितनी तेजी और ईमानदारी से अमल होता है, यही न केवल इन तीन गांवों बल्कि पूरे गेवरा क्षेत्र में शांति और स्थिरता की दिशा तय करेगा।




