जांच के बावजूद कार्रवाई शून्य, जनपद अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध
कोरबा (CG ई खबर | जिला संवाददाता : नारायण चंद्राकर)
कोरबा जिले के कोरबा एवं करतला जनपद में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। चौंकाने वाली बात यह है कि प्रमाणित मामलों में न तो ठोस जांच हो रही है और न ही किसी प्रकार की कार्रवाई, जिससे प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
बेहरचुवा पंचायत में मनरेगा व पीएम आवास में गड़बड़झाला
करतला विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत बेहरचुवा में प्रधानमंत्री आवास योजना और मनरेगा दोनों में बड़े स्तर पर गबन का खुलासा हुआ है। यहां एक ही परिवार के पति-पत्नी के नाम पर दो-दो आवास स्वीकृत कर दिए गए, जबकि नियमों के अनुसार ऐसा संभव नहीं है।
पुष्ट सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार—
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संगीता पति गोपाल दास, निवासी बेहरचुवा के नाम पर प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत किया गया।
- सामग्री भुगतान:
- 08/11/2024 – ₹40,000
- 26/12/2024 – ₹60,000
- 20/03/2025 – ₹20,000
- मजदूरी भुगतान: ₹16,524
- सामग्री भुगतान:
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इसके बाद संगीता के पति गोपाल दास (पिता – सहेत्तर दास) के नाम पर गलत तरीके से दूसरा प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत कर दिया गया।
- सामग्री भुगतान:
- 25/03/2025 – ₹40,000
- 11/07/2025 – ₹55,000
- सामग्री भुगतान:
सबसे गंभीर तथ्य यह है कि गोपाल दास द्वारा किसी भी प्रकार का आवास निर्माण कराया ही नहीं गया, इसके बावजूद फर्जी जियो-टैगिंग कर ₹23,490 की मजदूरी राशि भी निकाल ली गई। यह मामला स्पष्ट रूप से धोखाधड़ी और सरकारी राशि के गबन का है।
अधिकारियों को जानकारी, फिर भी कार्रवाई नहीं
सूत्रों का दावा है कि जनपद स्तर के अधिकारियों को इस पूरे फर्जीवाड़े की जानकारी होने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इससे यह संदेह गहराता जा रहा है कि कहीं न कहीं जिम्मेदार अधिकारियों की मौन सहमति या लापरवाही इस भ्रष्टाचार को संरक्षण दे रही है।
कराईनारा पंचायत में भी फर्जीवाड़े की आशंका
करतला विकासखंड के अंतर्गत ग्राम पंचायत कराईनारा के आश्रित ग्राम भेलवागुडी में भी प्रधानमंत्री आवास योजना में फर्जीवाड़े के आरोप सामने आए हैं।
यहां मनीराम यादव पिता महेश राम के नाम पर सत्र 2024–2025 में प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत किए जाने को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं, जिसकी जांच अभी लंबित बताई जा रही है।
जांच की मांग तेज
लगातार सामने आ रहे मामलों से यह साफ है कि प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी जनकल्याणकारी योजना को भ्रष्टाचार का माध्यम बनाया जा रहा है। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई और गबन की राशि की वसूली की मांग की है।
अब बड़ा सवाल यह है कि
क्या जिला प्रशासन इस मामले में निष्पक्ष जांच कराएगा, या फिर फाइलों में ही दबकर रह जाएगा यह घोटाला?


