(CG ई खबर | प्रमुख संपादक : ओम प्रकाश पटेल)
बिलासपुर : पति द्वारा पत्नी पर ब्वायफ्रेंड से वीडियो कॉल के दौरान न्यूड होकर बातचीत करने का आरोप लगाते हुए दायर तलाक याचिका के मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला दिया है। हाईकोर्ट ने महासमुंद फैमिली कोर्ट के आदेश को निरस्त करते हुए मामले की दोबारा सुनवाई करने के निर्देश दिए हैं।
हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि सीसीटीवी फुटेज से संबंधित सीडी को रिकॉर्ड पर लिया जाए और उसकी विधिवत सुनवाई की जाए।
65-B सर्टिफिकेट के बिना भी सबूत पर विचार संभव
इस मामले की सुनवाई हाईकोर्ट के जस्टिस संजय के. अग्रवाल और जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की डिवीजन बेंच ने की। कोर्ट ने कहा कि फैमिली कोर्ट की कार्यवाही में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जैसे CCTV फुटेज, CD या अन्य डिजिटल रिकॉर्ड को केवल इस आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता कि उनके साथ भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 65-B का प्रमाणपत्र संलग्न नहीं है।
कोर्ट ने फैमिली कोर्ट एक्ट, 1984 की धारा 14 और 20 का हवाला देते हुए कहा कि फैमिली कोर्ट को विवाद के प्रभावी निपटारे के लिए किसी भी दस्तावेज या साक्ष्य को स्वीकार करने का व्यापक अधिकार है, भले ही वह तकनीकी रूप से एविडेंस एक्ट की सभी शर्तों को पूरा न करता हो।
2012 में हुई थी शादी
मामले के अनुसार, महासमुंद निवासी महिला की शादी वर्ष 2012 में रायगढ़ जिले के निवासी युवक से हुई थी। पति जिंदल पावर तमनार में कर्मचारी था, जिसके चलते शादी के कुछ समय बाद ही दंपती तमनार में रहने लगे।
महिला का आरोप है कि तमनार आने के बाद पति ने अतिरिक्त पैसों की मांग शुरू कर दी और उसके साथ उत्पीड़न किया। इतना ही नहीं, पति ने कथित तौर पर पत्नी की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए बेडरूम में चोरी-छिपे CCTV कैमरे भी लगवा दिए।
CCTV का विरोध करने पर मारपीट का आरोप
पत्नी ने आरोप लगाया कि जब उसने कैमरे लगाने और लगातार परेशान किए जाने का विरोध किया तो पति ने उसके साथ मारपीट की और घर से निकालने की धमकी दी। नवंबर 2019 में दोनों परिवारों के बीच समझौते का प्रयास किया गया, लेकिन पति पत्नी को साथ रखने के लिए राजी नहीं हुआ। इसके बाद पत्नी ने तमनार थाने में उत्पीड़न और कमरे में CCTV लगाए जाने की शिकायत दर्ज कराई।
दांपत्य अधिकारों की बहाली बनाम तलाक याचिका
पत्नी ने फैमिली कोर्ट में दांपत्य अधिकारों की बहाली की याचिका दायर की, जबकि पति ने पत्नी पर क्रूरता, अन्य पुरुषों से अश्लील चैटिंग और वीडियो कॉल करने के आरोप लगाते हुए तलाक की याचिका दायर की। आरोपों के समर्थन में पति ने बेडरूम में लगे CCTV कैमरों की फुटेज CD के रूप में कोर्ट में पेश की थी।
हालांकि, महासमुंद फैमिली कोर्ट ने धारा 65-B का प्रमाणपत्र न होने का हवाला देते हुए CD को साक्ष्य मानने से इनकार कर दिया था और पति की तलाक याचिका खारिज कर दी थी। वहीं पत्नी की दांपत्य अधिकारों की बहाली की याचिका स्वीकार कर ली गई थी।
हाईकोर्ट में दी गई चुनौती
फैमिली कोर्ट के इसी आदेश को पति ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। अब हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट का आदेश निरस्त करते हुए पूरे मामले की नए सिरे से सुनवाई करने और CCTV फुटेज से संबंधित CD को रिकॉर्ड पर लेकर विचार करने के निर्देश दिए हैं।











