नई दिल्ली। मेघालय के चर्चित राजा रघुवंशी हत्याकांड मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी के सामने दो विकल्प रखे हैं। न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और पी.बी. वराले की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि या तो सोनम फिलहाल सरेंडर कर मुकदमे की कार्यवाही आगे बढ़ने दें या फिर मेघालय सरकार की जमानत को चुनौती देने वाली याचिका पर मेरिट के आधार पर बहस की जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने सोनम के वकील से कहा कि अदालत जमानत मामले पर मेरिट के आधार पर फैसला कर सकती है या फिर सोनम को सरेंडर करने का निर्देश दे सकती है, ताकि इस दौरान सार्वजनिक गवाहों की गवाही हो सके। पीठ ने मौखिक रूप से यह भी कहा कि आरोपी के लिए सरेंडर करना बेहतर विकल्प हो सकता है। इस पर सोनम के वकील ने निर्देश लेने के लिए समय मांगा और गुरुवार को जवाब देने की बात कही।
गिरफ्तारी के आधार को लेकर भी सवाल
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सोनम के वकील से सवाल किया कि गिरफ्तारी के समय कथित तौर पर ‘गिरफ्तारी के आधार’ नहीं बताए जाने का मुद्दा पहले क्यों नहीं उठाया गया।
वहीं, मेघालय सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि सोनम ने खुद पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया था। ऐसे में बाद में गिरफ्तारी के आधार नहीं बताए जाने का तर्क स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि गिरफ्तारी मेमो में केवल टाइपिंग की गलती हुई थी, जिसमें हत्या से संबंधित भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) के स्थान पर गलती से धारा 403(1) लिख दी गई थी।
सोनम की ओर से अदालत में दलील दी गई कि अभियोजन का पूरा मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित है।
हाईकोर्ट के जमानत आदेश को चुनौती
मेघालय सरकार ने हाईकोर्ट के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें ट्रायल कोर्ट से मिली सोनम की जमानत को बरकरार रखा गया था। हाईकोर्ट ने माना था कि गिरफ्तारी के समय सोनम को गिरफ्तारी के आधार उपलब्ध नहीं कराए गए थे, जिसके चलते उन्हें जमानत का लाभ मिलना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट के आदेश पर प्रारंभिक तौर पर सवाल उठाए थे, लेकिन सोनम के पहले ही जेल से रिहा हो जाने और कुछ समय हिरासत में रहने के कारण अंतरिम रूप से जमानत पर रोक नहीं लगाई थी। अब मामले की अगली सुनवाई गुरुवार को होगी, जहां सोनम की ओर से अपना पक्ष रखा जाएगा।


