प्रदर्शनकारियों का कहना है कि देश का युवा अपनी मांगों और अधिकारों को लेकर लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठा रहा है। ऐसे में उनकी समस्याओं को सुनने और संवाद के जरिए समाधान निकालने के बजाय पुलिस कार्रवाई का सहारा लिया जाना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
दिल्ली में 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में छात्र और युवा जुटे थे। प्रदर्शनकारियों की ओर से संसद की ओर मार्च का आह्वान किया गया था। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस ने मार्च की अनुमति नहीं होने और प्रतिबंधात्मक आदेश लागू होने का हवाला देते हुए प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोका। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की स्थिति बनी और लाठीचार्ज तथा आंसू गैस के इस्तेमाल की खबरें सामने आईं।
कोरबा में प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने सवाल उठाया कि आखिर लोकतंत्र में अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाने वाले युवाओं के साथ बल प्रयोग क्यों किया गया? उनका कहना था कि सरकार को युवाओं की समस्याओं का समाधान बातचीत और संवेदनशीलता के साथ करना चाहिए, न कि उनकी आवाज को दबाने के लिए पुलिस बल का इस्तेमाल करना चाहिए।
प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई से जुड़े वायरल वीडियो और सोशल मीडिया पर सामने आए विभिन्न दावों की निष्पक्ष जांच की मांग भी उठाई। कुछ वीडियो क्लिप्स में पुलिसकर्मियों द्वारा प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग किए जाने के दृश्य दिखाई देने का दावा किया जा रहा है। हालांकि, वायरल वीडियो में दिखाई देने वाले प्रत्येक व्यक्ति की पहचान और कार्रवाई की परिस्थितियों की स्वतंत्र पुष्टि समाचार रिपोर्टों से नहीं हो सकी है। इसलिए इस संबंध में निष्पक्ष जांच के बाद ही अंतिम निष्कर्ष सामने आ सकता है।
प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर सादे कपड़ों में मौजूद पुलिसकर्मियों द्वारा लाठीचार्ज किए जाने के आरोपों पर भी सवाल उठाए और मांग की कि यदि किसी पुलिसकर्मी ने नियमों का उल्लंघन किया है तो उसके खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार को यह बताना चाहिए कि युवाओं की समस्याओं का समाधान आखिर संवाद से क्यों नहीं किया जा रहा है। उनका आरोप है कि लोकतंत्र में असहमति और विरोध को दबाने की कोशिश देश की लोकतांत्रिक भावना के विपरीत है। उन्होंने भाजपा से भी सवाल किया कि जिन युवाओं के वोट और समर्थन से सरकार सत्ता में आती है, उन्हीं युवाओं की आवाज उठने पर पुलिस कार्रवाई क्यों देखने को मिलती है?
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि लोकतंत्र में सवाल पूछना, अपनी मांग रखना और शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराना नागरिकों का अधिकार है। सरकार किसी भी राजनीतिक दल की हो, युवाओं की आवाज को सुनना और उनकी समस्याओं का समाधान करना लोकतांत्रिक शासन की जिम्मेदारी है।
कोरबा में प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वे दिल्ली के छात्रों और युवाओं के साथ खड़े हैं तथा केंद्र सरकार से मांग करते हैं कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि पुलिस कार्रवाई में नियमों का उल्लंघन हुआ है तो जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई की जाए तथा भविष्य में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के साथ संवेदनशील और लोकतांत्रिक व्यवहार सुनिश्चित किया जाए।
अब सवाल यह है कि लोकतंत्र में असहमति की आवाज को सुना जाएगा या फिर उसे लाठी और आंसू गैस के जरिए दबाने की कोशिश जारी रहेगी?





