नराईबोध, कोरबा। ग्राम नराईबोध, वार्ड क्रमांक 29 के ग्रामीणों ने जिलाधीश एवं पुलिस अधीक्षक, कोरबा को शिकायत देकर निर्वाचित महिला पार्षद श्रीमती अमिला पटेल के पति श्री राकेश पटेल एवं जेठ श्री जगदीश पटेल पर कथित रूप से स्वयं को “पार्षद प्रतिनिधि” बताकर शासकीय एवं जनहित से जुड़े मामलों में दखल देने का आरोप लगाया है। शिकायतकर्ताओं ने छत्तीसगढ़ राजपत्र (असाधारण) क्रमांक 439, दिनांक 6 अगस्त 2026 में किए गए नियम संशोधन का हवाला देते हुए दोनों के कथित प्रतिनिधि के रूप में कार्य करने की जांच और नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है।
राजपत्र में महिला जनप्रतिनिधियों के परोक्ष प्रतिनिधित्व पर रोक का हवाला
शिकायत में छत्तीसगढ़ राजपत्र (असाधारण) क्रमांक 439, दिनांक 6 अगस्त 2026 का हवाला दिया गया है। उपलब्ध प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने वर्ष 2022 के संबंधित नियमों में संशोधन करते हुए नया नियम 4 जोड़ा है, जिसके तहत निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधि के पति, पुत्र, पुत्री, भाई, बहन अथवा अन्य निकट पारिवारिक सदस्य या नातेदार को उनके परोक्ष प्रतिनिधि अथवा समन्वयक के रूप में नामित या नियुक्त किए जाने पर रोक है।
इसी आधार पर ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि संबंधित व्यक्तियों द्वारा “पार्षद प्रतिनिधि” के नाम से किए जा रहे कथित कार्यों की वैधानिक स्थिति स्पष्ट की जाए और यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो आवश्यक कार्रवाई की जाए। यह ध्यान रखना जरूरी है कि राजपत्र में प्रतिनिधि/समन्वयक के रूप में नियुक्ति पर रोक और किसी व्यक्ति द्वारा वास्तव में नियम-विरुद्ध सरकारी कार्य करने का आरोप—दो अलग कानूनी प्रश्न हैं; दूसरे प्रश्न का निर्धारण उपलब्ध दस्तावेजों और सक्षम प्राधिकारी की जांच से होगा।
ठेके, रोजगार और SECL L&R मामलों में दबाव का आरोप
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि राकेश पटेल एवं जगदीश पटेल द्वारा ठेके, रोजगार, राशन कार्ड, पेंशन तथा SECL L&R से जुड़े मामलों में कथित रूप से दबाव एवं हस्तक्षेप किया जाता है। शिकायतकर्ताओं ने आम लोगों से कथित अवैध वसूली का आरोप भी लगाया है। ये आरोप शिकायत में लगाए गए हैं; समाचार प्रकाशन के समय इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और किसी सक्षम प्राधिकारी द्वारा इन्हें सिद्ध नहीं किया गया है।
प्रशासन से मांगी गई स्पष्ट व्यवस्था
शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि यदि जांच में यह पाया जाता है कि कोई व्यक्ति बिना वैधानिक अधिकार के निर्वाचित पार्षद के प्रतिनिधि के रूप में शासकीय कार्यों में हस्तक्षेप कर रहा है, तो उसे तत्काल ऐसी गतिविधियों से रोका जाए। साथ ही संबंधित नगरीय निकाय को यह स्पष्ट निर्देश देने की मांग की गई है कि सरकारी फाइल, सिफारिश, प्रस्ताव अथवा अन्य आधिकारिक कार्यवाही केवल कानून एवं लागू नियमों के तहत अधिकृत निर्वाचित प्रतिनिधि/अधिकारी के माध्यम से ही की जाए।
कानूनी दृष्टिकोण: शिकायत, जांच और दोषसिद्धि अलग-अलग चरण
कानूनी दृष्टि से किसी शिकायत में लगाए गए आरोप अपने-आप में अपराध या दोष सिद्ध नहीं करते। इसलिए इस समाचार में किसी व्यक्ति को आरोपी से आगे बढ़ाकर दोषी नहीं बताया जा रहा है। यदि शिकायत के साथ लगाए गए फोटो, वीडियो, दस्तावेज या अन्य अभिलेखों की जांच में किसी वैधानिक प्रावधान का उल्लंघन पाया जाता है, तो सक्षम अधिकारी अपने अधिकार क्षेत्र के अनुसार प्रशासनिक अथवा वैधानिक कार्रवाई कर सकते हैं। इसी तरह कथित वसूली या दबाव के आरोपों पर भी संबंधित साक्ष्य की जांच आवश्यक होगी।
वहीं, पत्रकारिता के दृष्टिकोण से भी आरोपों को “शिकायत के अनुसार”, “आरोप है”, “कथित रूप से” जैसे स्पष्ट attribution के साथ प्रस्तुत करना और संबंधित पक्ष का पक्ष प्रकाशित करना महत्वपूर्ण है। समाचार का उद्देश्य किसी व्यक्ति को दोषी घोषित करना नहीं, बल्कि प्रशासन के समक्ष प्रस्तुत शिकायत और उससे जुड़े सार्वजनिक हित के प्रश्न को सामने रखना है।
शिकायत के साथ साक्ष्य देने का दावा
शिकायतकर्ताओं ने राजपत्र क्रमांक 439 की छायाप्रति के साथ कथित हस्तक्षेप से संबंधित फोटो एवं वीडियो साक्ष्य उपलब्ध कराने का उल्लेख किया है। शिकायत की प्रतिलिपि एसडीएम कटघोरा, नगर पालिका के आयुक्त, नगर पालिका बांक-मोंगरा के अध्यक्ष तथा छत्तीसगढ़ किसान सभा, जिला कोरबा को भी भेजी गई है।
संबंधित पक्ष का पक्ष भी महत्वपूर्ण
समाचार प्रकाशन के समय उपलब्ध शिकायत में राकेश पटेल एवं जगदीश पटेल की ओर से कोई स्वतंत्र लिखित प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है। CG ई खबर संबंधित पक्ष का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित करेगा। यह प्रावधान इसलिए रखा गया है ताकि समाचार एकतरफा आरोप के रूप में नहीं, बल्कि शिकायत और प्रशासन के समक्ष उठाए गए सार्वजनिक हित के प्रश्न के रूप में प्रस्तुत हो।





