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नाबालिग मुस्कान चौहान आत्महत्या मामला गरमाया: सोशल मीडिया पर फोटो वायरल कर प्रताड़ना का आरोप, SP से निष्पक्ष जांच की मांग


कोरबा, 18 अगस्त 2026।
जिले के हरदी बाजार क्षेत्र में 14 वर्षीय नाबालिग कुमारी मुस्कान चौहान की आत्महत्या का मामला अब गंभीर रूप लेता जा रहा है। मृतका के परिजनों और सर्व पत्रकार एकता महासंघ छत्तीसगढ़ ने आरोप लगाया है कि सोशल मीडिया पर फोटो वायरल कर नाबालिग को कथित रूप से मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था। मामले में हरदी बाजार पुलिस पर भी 21 और 22 जुलाई को शिकायत लेने में कथित लापरवाही बरतने के आरोप लगाए गए हैं।

सर्व पत्रकार एकता महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष प्रमोद कुमार बंजारे के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस अधीक्षक कोरबा को लिखित शिकायत देकर पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराने तथा दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की मांग की है। महासंघ ने अपने पत्र में मृतका के पिता नरेश कुमार चौहान द्वारा दिए गए आवेदन का भी उल्लेख किया है।

सोशल मीडिया पर फोटो वायरल करने का आरोप

महासंघ के पत्र के अनुसार, ग्राम हरदी बाजार निवासी 14 वर्षीय मुस्कान चौहान को निखिल कंवर, उसकी माता एवं दीदी द्वारा सोशल मीडिया पर फोटो वायरल कर कथित तौर पर मानसिक रूप से परेशान किए जाने का आरोप लगाया गया है। परिवार का दावा है कि इस कथित प्रताड़ना से परेशान होकर मुस्कान और उसके माता-पिता 21 एवं 22 जुलाई 2026 को शिकायत लेकर हरदी बाजार थाना पहुंचे थे।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि उस दौरान पुलिस द्वारा शिकायत दर्ज नहीं की गई और मामले में तत्काल कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद 24 जुलाई 2026 को मुस्कान ने आत्महत्या कर ली। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।


पुलिस की भूमिका पर भी उठे सवाल

मामला सामने आने के बाद थाना हरदी बाजार पुलिस की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। महासंघ ने मांग की है कि 21 और 22 जुलाई को थाने में मौजूद पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जाए।

संगठन ने थाने की CCTV फुटेज, रोजनामचा, शिकायत संबंधी रिकॉर्ड तथा अन्य उपलब्ध साक्ष्यों को सुरक्षित कर जांच में शामिल करने की मांग की है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि परिवार द्वारा शिकायत किए जाने पर पुलिस ने क्या कार्रवाई की थी।

डिजिटल साक्ष्यों की जांच की मांग

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए महासंघ ने मृतका और आरोपियों से संबंधित मोबाइल फोन एवं डिजिटल उपकरणों की जांच, FSL परीक्षण, CDR तथा सोशल मीडिया गतिविधियों के तकनीकी विश्लेषण की मांग की है। संगठन का कहना है कि डिजिटल साक्ष्य मामले की वास्तविक परिस्थितियों को सामने लाने में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

महासंघ ने नाबालिग से जुड़े प्रकरण को देखते हुए POCSO एक्ट सहित अन्य लागू कानूनों के तहत कार्रवाई की मांग की है। हालांकि, किन धाराओं में अपराध बनता है और किस व्यक्ति की क्या भूमिका है, यह पुलिस जांच एवं उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर तय किया जाना है।

SIT गठित करने सहित कई मांगें

पुलिस अधीक्षक से की गई शिकायत में महासंघ ने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए विशेष जांच टीम (SIT) गठित करने, आरोपियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई करने और निर्धारित समयसीमा में जांच पूरी करने की मांग की है।

महासंघ ने विशेष रूप से मांग की है कि:

  • आरोपों की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के खिलाफ FIR एवं वैधानिक कार्रवाई की जाए।
  • मोबाइल, सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल साक्ष्यों का फॉरेंसिक परीक्षण कराया जाए।
  • 21-22 जुलाई को थाना हरदी बाजार में मौजूद पुलिसकर्मियों की भूमिका की जांच की जाए।
  • थाने की CCTV फुटेज एवं रोजनामचा सुरक्षित रखा जाए।
  • मामले की निगरानी वरिष्ठ अधिकारियों के स्तर से की जाए।
  • निष्पक्ष जांच के लिए SIT गठित की जाए।
  • पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए नियमानुसार प्रभावी कार्रवाई की जाए।

कई अधिकारियों को भेजी गई शिकायत की प्रतिलिपि

महासंघ द्वारा शिकायत की प्रतिलिपि अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कोरबा, संबंधित अनुविभागीय पुलिस अधिकारी, थाना प्रभारी हरदी बाजार, कलेक्टर कोरबा, छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग, बाल अधिकार संरक्षण आयोग तथा उप मुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा को भेजे जाने की जानकारी दी गई है।

अब पुलिस जांच पर टिकी नजर

नाबालिग की मौत से जुड़े इस संवेदनशील मामले में अब पुलिस जांच की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। परिवार और महासंघ द्वारा लगाए गए आरोपों की सच्चाई, 21-22 जुलाई को पुलिस से संपर्क किए जाने की स्थिति तथा सोशल मीडिया पर कथित रूप से फोटो वायरल किए जाने की पूरी परिस्थितियां जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगी।

फिलहाल, मामले में पुलिस प्रशासन की ओर से आधिकारिक जांच निष्कर्ष या आरोपों की पुष्टि सामने आना बाकी है। ऐसे में किसी भी व्यक्ति को दोषी ठहराने के बजाय जांच के निष्पक्ष और तथ्यात्मक परिणाम का इंतजार करना जरूरी है।

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